इंदौर. छोटी ग्वालटोली पुलिस एसपी को भी गुमराह करने में पीछे नहीं। तीन महीने पहले एक युवक की हत्या हुई। उसका पोस्टमॉर्टम तो हुआ एमवाय अस्पताल में लेकिन शिकायती पत्र भेजा जिला अस्पताल। वह भी एसपी के दस्तखत से। जाहिर है उन्हें भी गलत जानकारी दी गई।
26 मई 2008 को नंदननगर का महेश मोतीराम धनगर (30) डावर होटल, छोटी ग्वालटोली के पास से गुजर रहा था तभी होटल से निकले अभय वर्मा, दौलतगंज, सतीश शंकरलाल, मुराई मोहल्ला और विकास यादव, जबरन कॉलोनी से विवाद हो गया। उन्हें लगा महेश घूरकर देख रहा है। इस पर चाकू घोंपकर हत्या कर दी। तमाम प्रत्क्षदर्शी होने के बाद भी आरोपी तीन दिन बाद पकड़े गए।
उधर, महेश का पोस्टमॉर्टम तो एमवाय अस्पताल में कराया लेकिन 13 अगस्त को जिला अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. एसके त्रिवेदी को एसपी आरके चौधरी द्वारा हस्ताक्षरित पत्र मिला। उसमें लिखा था- ‘महेश का पोस्टमॉर्टम डॉ. लावजकर ने 27 मई को किया। प्रकरण के आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। जब्त चाकू क्वेरी के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज भेजा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट व क्वेरी रिपोर्ट नहीं मिलने से अपराधी जमानत पर रिहा हो सकते हैं। अत: दोनों रिपोर्ट जल्द देने के लिए मेडिकल कॉलेज के डीन को निर्देशित करें।’
पश्चिमी थानों के मामले ही आते हैं
पत्र मिलने पर डॉ. त्रिवेदी को भी आश्चर्य हुआ क्योंकि छोटी ग्वालटोली थाना पूर्वी क्षेत्र में आता है और 10 नवंबर 2006 से जिला अस्पताल में शुरू हुए पोस्टमॉर्टम विभाग का कार्यक्षेत्र पश्चिमी थाने व कुछ ग्रामीण थाने हैं। फिर भी कहीं विशेष परिस्थिति में जिला अस्पताल में पोस्टमॉर्टम न हुआ हो इसलिए पत्र पोस्टमॉर्टम विभाग प्रभारी डॉ. भरत वाजपेयी को भेज दिया। जांच में पता चला पोस्टमॉर्टम एमवायएच में ही हुआ था लेकिन डॉ. लावजकर न जिला अस्पताल में हैं, न एमवायएच के फोरेंसिक विभाग में।
गलती हो गई होगी
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले एसपी आरके चौधरी से ‘भास्कर’ ने सवाल किया तो बोले दिनभर में कितने ही पत्र भेजे जाते हैं। इस तरह के पत्र थाने से मिली जानकारी के आधार पर रीडर पत्र बनाकर भेज देते हैं।
पुलिस हटा दें तो सुधर जाए ट्रैफिक
सरवटे बस स्टैंड से शास्त्री ब्रिज तक बिगड़े ट्रैफिक को लेकर छोटी ग्वालटोली में पदस्थ रहे एक इंस्पेक्टर ने बताया इसका प्रमुख कारण छोटी ग्वालटोली पुलिस ही है। वहां तैनात जवान बसों से 50, नगरसेवा से 20, सिटी वैन से 10 रुपए रोज व रिक्शे से साप्ताहिक उगाही करते हैं। इससे गाड़ियां रेंगकर चलती है। उन्हें हटा दें तो ट्रैफिक अपने-आप सुचारू हो जाए।
अब जीआरपी बढ़ाएगी कदम
रेलवे स्टेशन के सामने वाहन गुत्थमगुत्था होने से राहगीरों के साथ स्टेशन परिसर से निकलने वाली गाड़ियां भी फंस जाती है। ऐसे में रेलवे पुलिस (जीआरपी) को मोर्चा संभालना पड़ता है। हालांकि उनका कार्यक्षेत्र स्टेशन सीमा पर समाप्त हो जाता है।
बाहर का क्षेत्र छोटी ग्वालटोली पुलिस के अधीन होने से वे कुछ कर नहीं पाते। फिर भी स्टेशन के सामने के ट्रैफिक से निपटने के लिए जीआरपी ने कार्यक्षेत्र से बाहर भी कार्रवाई की तैयारी की है।