इंदौर.
अपनी किताबों से युवाओं में खासे चर्चित हो रहे लेखक, चेतन भगत अपने सृजन की प्रेरणा कृष्ण को मानते हैं। जन्माष्टमी पर अपने प्रवास के दौरान इंदौर भास्कर कार्यालय आए।
उन्होंने कृष्ण और जन्माष्टमी को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की। जन्माष्टमी को उन्होंने आनंद का दिन बताते हुए कहा कि कृष्ण को जीवन में उतार लें तो हर जगह बृजभूमि हो जाएगी और हर व्यक्ति कृष्ण की तरह ऊर्जा का पुंज।
बहुआयामी सूत्र
कृष्ण के बहुआयामी चरित्र से प्रेरणा लें। उनमें बच्चों की तरह नटखटपन है तो महायोगी की तरह गजब का बुद्धिकौशल भी। यानी अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए खुद में जोश के साथ ही दृढ़ता भी पैदा करें।
तीन गुण जो उनसे सीखना चाहिए
निष्पक्षता- अपने आचार-व्यवहार में निष्पक्षता लाएं ताकि समाज के हर वर्ग में आनंद हो।
न्याप्रियता- सबके प्रति समभाव रखें, ताकि सभी का सम्मान बरकरार रहे।
चंचलता- हर इंसान मन से चिरयुवा रहे ताकि हमेशा कुछ नया और खूबसूरत करने का जज्बा बना रहे।
यह है महोत्सव
विश्वभर में वेलेनटाइन-डे को प्रेमपर्व के तौर पर मनाते हैं लेकिन प्रेम के असल प्रतीक तो कृष्ण हैं। इसीलिए जन्माष्टमी को सब जगह धूमधाम से मनाइए। यह महज धार्मिक पर्व नहीं तन और मन की पवित्रता और साधना का महोत्सव है।