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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. पंजाब के लोकपाल दफ्तर में इन दिनों शिकायतें नहीं आ रही हैं। धर्मवीर सहगल के लोकपाल रहते लोगों ने कई पूर्व मंत्रियों के खिलाफ अपनी शक्तियों के दुरुपयोग की शिकायतें की थीं। लेकिन उनके अचानक निधन के बाद करीब तीन साल तक नए लोकपाल की नियुक्ति नहीं की गई। इस वजह से लंबित पड़े करीब 324 मामलों पर भी कार्रवाई रुकी रही।
जॉइंट रजिस्ट्रार एच.एस. दोआबिया से महीने में आनी वाली शिकायतों की संख्या के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बमुश्किल एक या दो शिकायत आती हैं। आजकल तो लोग वैसे भी बाढ़ से बचाव में व्यस्त हैं.अधिकारियों और मंत्रियों के खिलाफ शिकायतें करने का समय ही किसके पास है।
वर्ष 2001 में यहां जस्टिस धर्मवीर सहगल को लोकपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई। 16 दिसंबर, 2002 को उनका निधन हो गया। उसके बाद 2006 तक सरकार ने राज्य में लोकपाल की नियुक्ति ही नहीं की। इतने लंबे समय तक लोकपाल पद पर किसी के नियुक्ति न होने से लोग लोकपाल दफ्तर में शिकायत करने के प्रति उदासीन हो गए।
2006 में पटना हाईकोर्ट से रिटायर्ड जस्टिस दिलजीत सिंह धालीवाल की नियुक्ति की गई, लेकिन उनके पास न पूरा स्टाफ है और न जांच के लिए पुलिस अफसर हैं। ऐसी स्थिति में यदि शिकायते आती भी हैं तो उन पर समय से कार्रवाई होना मुमकिन नहीं हो पाता है।
कौन कर सकता है शिकायत
लोकपाल कार्यालय में कोई भी नागरिक (जो किसी सरकारी पद पर कार्यरत नहीं है) वह मुख्यमंत्री, विधायक, चेयरमैन और स्टेट-सेंटर एक्ट के अधीन बोर्ड के चेयरमैन और सदस्य, सरकारी कंपनी के चेयरमैन के खिलाफ शिकायत कर सकता है। यदि इनमें से किसी भी पब्लिक मैन ने किसी कानून की अवहेलना कर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया हो, नाजायज तरीके से अपने किसी करीबी को फायदा पहुंचाया हो, किसी के नागरिक अधिकार छीने हों तो पीड़ित लोकपाल कार्यालय में एक एफिडेविट और 1000 रुपए का ड्राफ्ट लगा कर अपनी लिखित शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
लोकपाल उस शिकायत को आईजी इन्वेस्टिगेशन को देगा। जांच के बाद आईजी इन्वेस्टिगेशन अपनी रिपोर्ट लोकपाल को सौंपेगे। लोकपाल उसे देखने के बाद राज्यपाल के पास भेजेंगे। अगर राज्यपाल लोकपाल की रिपोर्ट से सहमत हों तो उसे वापस लोकपाल के पास भेज देते हैं और फिर कार्रवाई के लिए लोकपाल अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपते हैं।