bhaskar Web English
HomeNewsRajasthanBikaner Bikaner

ताकि हो फिर परंपरा की प्रतिष्ठा

बीकानेर. परंपराएं वस्तुत: जीवन दर्शन हैं। कई कसौटियों पर कसी जाने के बाद कोई धारणा या मान्यता परंपरा का रूप लेती है और फिर विभिन्न माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है।

बीकानेर का रतनबिहारी मंदिर भी एक परंपरा की अभिव्यक्ति है। वस्तुत: यह संस्कृति का मंदिर है। एक ऐसी संस्कृति जिसका अपना वर्षो का इतिहास है। यह देवालय सिर्फ इसलिए है क्योंकि यहां ठाकुरजी विराजित हैं लेकिन यह एक सांस्कृतिक केंद्र भी है जहां वैष्णव संप्रदाय अपने संपूर्ण शास्त्रीय स्वरूप के साथ प्रकट होता है।

भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप की पूजा करने वाले संप्रदाय की हवेली परंपरा सर्वागीण विकास की पाठशाला है। जहां यह सिखाया जाता है कि सकारात्मक सोच के साथ किस तरह व्यक्ति अपना और समाज का विकास करे। वर्षो पहले रतनबिहारी मंदिर में वैष्णव परंपरा की समृद्ध धारा थी। यही वजह है कि बीकानेर में हजारों की तादाद में पुष्टिमार्गी वैष्णव रहते हैं।

वक्त के साथ बदलाव आया तो रतनबिहारी मंदिर की पूजा-अर्चना का काम सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। देवस्थान विभाग यहां पूजा करवाने लगा लेकिन वैष्णव परंपरा के अनुसार ठाकुरजी की पूजा नहीं हुई तो वैष्णवों में रोष भी रहा।

कई बार वैष्णवों ने इस संबंध में देवस्थान विभाग के अधिकारियों से मिलकर बात भी की लेकिन बात बनी नहीं और ठाकुरजी की सेवा सामान्य रूप से ही चलती रही। इस बीच जगदगुरु पंचम पीठाधीश्वर वल्लभलालजी महाराज बीकानेर पहुंचे तो उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि ठाकुरजी की सेवा वैष्णव परंपरा से नहीं हो रही है। उन्होंने देवस्थान विभाग ने कहा कि हमें सिर्फ ठाकुरजी दे दो, हम अपने आप सेवा कर लेंगे।

रतनबिहारी मंदिर में हमें ठाकुरजी के अलावा कुछ भी नहीं चाहिए। उस वक्त तो बात आगे नहीं बढ़ी लेकिन कुछ ही दिनों में सरकार की एक नीति उम्मीद बनकर सामने आई। सरकार की ‘अपना काम, अपना धाम, अपना नाम’ योजना जब घोषित की तो वल्लभलाल महाराज ने रतनबिहारी मंदिर लेने के लिए दरख्वास्त लगा दी। उधर, जयपुर के हवामहल स्थित वैष्णव मंदिर के लिए भी यही प्रक्रिया शुरू हुई।

हवामहल मंदिर मिल गया और इसके बाद रतनबिहारी मंदिर के लिए भी स्वीकृति जारी कर दी गई। वल्लभलाल महाराज का कहना है हवामहल मंदिर को पूरी तरह से वैष्णव परंपरा से अलंकृत कर दिया गया है।

सरकार ने हमें उम्मीद की किरण दिखाई तो हम भी पीछे नहीं हटे और बीकानेर के रतन बिहारी मंदिर में भी फिर से वैष्णव परंपराओं को जीवित करेंगे। उल्लेखनीय है कि देवस्थान विभाग इस योजना के तहत दस साल के लिए मंदिर सुपुर्द करता है। सेवा-पूजा का काम बेहतर तरीके से चलने पर अवधि को विस्तारित भी किया जा सकता है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: