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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. नक्सलियों से लड़ने के लिए पिछले साल बनाए गए विशेष कार्रवाई दस्ते (एसटीएफ) के एक हजार में से 80 से ज्यादा जवान अब मोर्चे पर नहीं हैं। सशस्त्र बलों के इन जवानों को डेढ़ गुना वेतन पर एसटीएफ में रखा गया था। जंगलवार स्कूल में खास ट्रेनिंग देकर इन्हें नक्सलियों से लड़ाई के लिए बस्तर के जंगलों में उतारा गया। इन जवानों के अनफिट होने की वजह से पुलिस महकमे में खलबली मच गई है। एसटीएफ में भर्ती के नियम बदले जा रहे हैं।
अनफिट जवानों के बारे में पुलिस मुख्यालय ने खामोशी अख्तियार कर ली है। एक आला अफसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि अगर यह बात सार्वजनिक होती है तो मोर्चे पर तैनात फोर्स में हताशा का अंदेशा है। पुलिस मुख्यालय ने इन जवानों की पहचान कर ली है। सूत्रों ने बताया कि इनमें से करीब 45 जवान शारीरिक या मानसिक रूप से लड़ाई के लिए फिट नहीं हैं। जंगलवार स्कूल ने एसटीएफ में भर्ती से पहले जो परीक्षा ली थी, उसमें इन जवानों ने अच्छे मार्क्स लाए।
ट्रेनिंग के दौरान भी उनका प्रदर्शन अच्छा था लेकिन आमने-सामने की लड़ाई में वे खुद को कमजोर महसूस करने लगे। ऐसे जवानों के प्रति पुलिस का रुख संवेदनात्मक होगा। उन्हें पिछले वेतन और सुविधाओं के साथ सशस्त्र बलों की कंपनियों को लौटा दिया जाएगा।
पुलिस मुख्यालय उन लोगों के प्रति सख्त रवैया अपनाने जा रहा है जिन्होंने एसटीएफ में तैनात होने के कुछ दिन बाद छुट्टी ली और वापस बस्तर नहीं लौटे। इनकी संख्या करीब 35 है। सूत्रों ने बताया कि सभी राज्य के मैदानी इलाकों (रायपुर और बिलासपुर संभाग के कुछ जिलों) से हैं। इनका रिकार्ड निकलवा लिया गया। पुलिस मुख्यालय इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। डीजीपी ने कहा कि ये भगोड़े नहीं हैं, लेकिन उनका कृत्य गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में है।
कैसे हुआ चयन : पुलिस मुख्यालय की इंटेलिजेंस विंग ने 2007 में एसटीएफ गठन की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) से अच्छे जवान चुने गए। उनकी लिखित परीक्षा हुई। योग्य पाए गए 1000 जवानों को डेढ़ गुना वेतन के साथ जंगल वारफेयर स्कूल में एक साल की सख्त ट्रेनिंग दी गई।
करीब पांच माह पहले एसटीएफ को बस्तर के धुर नक्सल इलाकों में तैनात कर दिया गया। एसटीएफ ने नक्सल मोर्चे पर जबर्दस्त लड़ाई लड़ी है। सिवाए उन जवानों के, जिन्होंने मैदान छोड़ दिया।
विशेषज्ञों से पड़ताल : डीजीपी विश्व रंजन ने बताया कि एसटीएफ जवानों की कुछ समस्याओं की पड़ताल मनोविशेषज्ञों की एक खास टीम से कराई गई है। इसमें पता चला है कि कुछ और जवान अच्छी तरह लड़ तो रहे हैं लेकिन अब एसटीएफ में नहीं रहना चाहते। इनकी सूची भी तैयार कर ली गई।
इन समस्याओं से निपटने के लिए एसटीएफ भर्ती नियम में कुछ अनिवार्यताएं लागू की जा रही हैं। सुरक्षा कारणों से इसका खुलासा नहीं किया जा सकता।
बस्तर नाइट मेयर : बस्तर पुलिस के लिए अरसे से नाइट मेयर बना हुआ हुआ है। जिन पुलिस अफसरों और कर्मचारियों का बस्तर तबादला होता है, वे आमतौर से कोशिश करते हैं कि ट्रांसफर रुक जाए। लेकिन लड़ाई के मैदान से लौटने या गायब हो जाने का यह पहला मामला है, इसलिए पुलिस गंभीर है।