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बिहार में बाढ़ राष्ट्रीय आपदा: प्रधानमंत्री

पुर्णिया. bihar प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा करार देते हुए राहत और बचाव अभियान के लिए मदद के तौर पर 1,000 करोड़ रुपए तथा 1.25 लाख टन खाद्यान्न देने का एलान किया है। इससे पहले उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित सुपौल, सहरसा, अररिया और मधेपुरा जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया।

कोसी नदी द्वारा मार्ग बदलने के कारण करीब 14 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें अगले साल मार्च-अप्रैल तक अस्थाई कैंपों में रहना पड़ सकता है। मनमोहन सिंह एवं सोनिया नई दिल्ली से वायुसेना के विशेष विमान से पूर्णिया एअरबेस पहुंचे तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सर्वेक्षण के लिए उन्होंने हेलीकाप्टर से उड़ान भरी। उनके साथ केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटील के अलावा लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान जैसे केंद्रीय मंत्री तथा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी हवाई सर्वेक्षण किया।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान यह जानकारी दी थी किबाढ़ के मौजूदा दौर में 55 से अधिक लोग मारे गए हैं तथा 15 जिलों के 25 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

उप्र में एक तिहाई जिले प्रभावित : उधर, उत्तरप्रदेश के करीब एक तिहाई जिलों में कई प्रमुख नदियों में जलस्तर बढ़ने के कारण बाढ़ से उपजी स्थिति गंभीर बनी हुई है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक बाढ़ के कारण 725 लोग मारे गए हैं।

नावों का इस्तेमाल : बाढ़ की चपेट में 21 जिलों के 3,691 गांव आए हैं। इनमें से 674 पानी से पूरी तरह घिरे हुए हैं और वहां आवागमन के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

पांच जिलों पर ज्यादा असर : प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलावा सीतापुर, सुल्तानपुर, लखीमपुर खीरी तथा बलिया को अन्य बाढ़ग्रस्त जिलों के साथ अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। बाढ़ग्रस्त जिलों में बहराइच, बलरामपुर, बाराबंकी, गोरखपुर, कन्नौज, देवरिया, महाराजगंज, रामपुर, संत कबीरनगर, फरुखाबाद, सिद्धार्थनगर, उन्नाव, गोंडा, आजमगढ़, बस्ती और फैजाबाद शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।





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