News
Metros
Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
बीजिंग ओलिंपिक में 1 गोल्ड और 2 ब्रोंज मेडल जीत कर हम सभी काफी खुश है। चलो इस बार 3 मेडल तो आए। पर इससे आगे क्या कोई सोच रहा है, क्या ओलिंपिक को लेकर कोई नीति होनी चाहिए ताकि हम भी चीन और अमेरिका की तरह ओलिंपिक में दबदबा बना सकें। इस तरह की योजनाएं बननी शुरू हो गई हैं।
सरकार या फेडरेशन का तो पता नहीं, लेकिन एक खिलाड़ी के दिमाग में भारतीय खेलों के लिए एक रोडमैप बन रहा है जिसने पहली बार ओलिंपिक के इतिहास में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया है।
अभिनव बिंद्रा एक जिम्मेदारी निभाने के लिए अपने आप को तैयार कर रहे हैं। अभिनव का मानना है कि भारतीय खिलाड़ी भी 3 से ज्यादा मेडल जीत सकते हैं बर्शते उन्हें सही दिशा और खेलों का उपयुक्त माहौल दिया जाए। इसी मसले पर अभिनव ने भास्कर के साथ अपने विचार सांझे किए।
सवाल: आपने एक रोड मैप की बात की है, किस तरह का होगा यह मैप?
जवाब: सबसे पहले हमे अपना स्ट्रक्चर सही कर एक बेहतर माहौल तैयार करना होगा। मैं इसमें योगदान देने के लिए तैयार हूं। अभी इस पर काम कर रहा हूं और मेरे दिमाग में काफी कुछ है। जब कुछ तय हो जाएगा तो आपके सामने आऊंगा। फिलहाल ज्यादा नहीं बता सकता।
सवाल: कितने साल लगगे यह हासिल करने में?
जवाब: अगर हम आज शुरू करें तो भी 10 साल आराम से लग जाएंगे। नीचे से ऊपर तक सब कुछ बदलना होगा। अभी हमारा ढांचा जिस हालात में वह हम सभी जानते हैं। लेकिन शुरुआत तो करनी होगी और सही तरीके से इसे लागू करने में इतना वक्त तो चाहिए।
सवाल: ग्रास रूट लेवल अभी उतना सिस्टमाइज नहीं है, उसके लिए कुछ प्लानिंग?
जवाब: यह तो हमारे खेलों का बेस है। दरअसल ग्रास रूट लेवल पर ही हम लोगों को शुरुआत करनी होगी। आज की तारीख में चीन जैसे देशों में ग्रास रूट पर काफी वर्क होता है क्योंकि वे जानते हैं कि यही खिलाड़ी भविष्य के स्टार होंगे।
सवाल: क्या हमें किसी देश का ओलिंपिक मॉडल एडाप्ट करना चाहिए?
जवाब: मुझे नहीं लगता कि यहां कोई मॉडल कामयाब हो पाएगा। हमे अपना सिस्टम ही बेहतर बनाना होगा। इंडिया में टेलेंट की कमी नहीं है, बस जरूरत है टेलेंट को उस लेवल तक पहुंचाने की जहां हम मेडल की उम्मीद लगाते हैं। चीन को ओलंपिक के शानदार आयोजन के लिए वाहवाही मिल रही है क्योंकि एक बेहतर रणनीति बनाई थी। हमें भी यही काम यहां करना होगा मेडल लाने के लिए।
सवाल: बीजिंग में आए 3 मेडल के बाद सरकार और फेडरेशन के रोल को आप किस तरह से देखते हैं?
जवाब: मेरे हिसाब से एक विजन की जरूरत है। जब हमारे सामने एक गोल होगा तो सभी उसको हासिल करने का प्रयास करेंगे। जहां तक सरकार और फेडरेशन की बात है तो सरकार पैसा खर्च कर रही है, फेडरेशन को देखना होगा कि वह किस तरह से इसका यूज करती है। मेरे हिसाब से फेडरेशन ज्यादा से ज्याद जिम्मेदार बनें।
सवाल: एक शूटर होने के नाते शूटिंग पर ज्यादा तवज्जो रहेगी?
जवाब- मुझे यह सवाल हमेशा पूछा जाता है। ऐसा नहीं है, शूटिंग के साथ-साथ दूसरे खेलों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। तभी एक स्पोर्ट्स कल्चर डेवलप हो पाएगा। हमारा मकसद भारत को ओलंपिक में ज्यादा से ज्यादा मेडल दिलाना है और ऐसा तभी हो पाएगा जब सभी गेम्स के बारे में सोचेंगे।