जयपुर.
जयपुर धमाकों के संबंध में पुलिस की पहले और बाद में बरती गई लापरवाही का ‘भास्कर’ में खुलासा होने के बाद पुलिस मुख्यालय और सचिवालय में दिनभर हलचल मची रही।
राजस्थान पुलिस की लापरवाही की खबर भास्कर में प्रकाशित होने के बाद पूरे इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने पुलिस मुख्यालय में डेरा डाल दिया लेकिन अधिकारी कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे। कुछ ही अफसर मीडिया से बात कर पा रहे थे जबकि कुछ मुख्यालय से नदारद रहे। जो बात कर रहे थे, वे भी उच्चधिकारियों से बात करने के लिए कहते रहे। लोगों में चर्चा का विषय यही रहा कि जब धमाकों से पहले ही मध्यप्रदेश पुलिस आरोपियों के नाम-पते तक अपनी रिपोर्ट में बता चुकी थी तो आखिर हमारी पुलिस ने इतनी बड़ी लापरवाही कैसे की? भास्कर संवाददाता ने डीजीपी से लेकर मामले से जुड़े हर अधिकारी से बात कर सच्चई की तह तक पहुंचने की कोशिश की।
दिनभर इंतजार, लेकिन नहीं आए एडीजी
नागौरी और उसके साथियों से पूछताछ नोट तथा जांच एजेंसी की लापरवाही के खुलासे के बाद जब एडीजी क्राइम एके जैन से फोन पर बातचीत की तो उन्होंने समय नहीं होने की बात कहकर फोन काट दिया।
गुरुवार दिनभर पुलिस मुख्यालय में उनके कार्यालय में भी मीडियाकर्मी इंतजार करते रहे, लेकिन वे नहीं आए। वहां बैठे कर्मचारियों ने बताया कि एडीजी सुबह आकर कहीं निकल गए। पत्रकार दिनभर पुलिस मुख्यालय में रहे तथा एडीजी क्राइम ए के जैन का इंतजार करते रहे।
लेकिन वे नहीं आए। इस दौरान मीडियाकर्मियों में चर्चा भी रही कि किसी ने उनको फोन कर बता दिया होगा। बाद में संवाददाता ने जब उनको फोन कर मध्यप्रदेश पुलिस की रिपोर्ट के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने समय नहीं होने की बात कहकर फोन काट दिया। संवाददाता ने कई फोन किए लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
हां, हमारे पास था वह दस्तावेज
जयपुर. नागौरी और उसके 12 साथियों से पूछताछ के बाद तैयार की गई मध्यप्रदेश पुलिस की पूछताछ रिपोर्ट का जयपुर बम कांड के सवा तीन माह बाद भास्कर में खुलासा होने के बाद भी डीजीपी केएस बैंस गुरुवार को पहले तो कुछ बता नहीं पाए। फिर शाम को उन्होंने स्वीकार कर लिया कि उनके पास भी वह इंट्रोगेशन रिपोर्ट थी।
साथ ही उनका कहना था कि उस रिपोर्ट में तो ऐसा कहीं भी नहीं था कि आतंकी जयपुर में ब्लास्ट को अंजाम देंगे। भास्कर ने गुरुवार को डीजीपी बैंस सहित जांच करने में लगे अधिकारियों से बातचीत की, तो उन्होंने जवाब इस तरह दिए-
दोपहर 1:30 बजे भास्कर की बातचीत
>> सवाल: अजमेर दरगाह ब्लास्ट के बाद एमपी पुलिस ने मार्च में सिमी सरगना सफदर नागौरी और उसके साथियों को पकड़ा था, जिस पर जांच करने के लिए टीम राजस्थान से गई थी?
डीजीपी: गई होगी। मेरी जानकारी में नहीं है। मैं कुछ देखकर ही आपको बता सकता हूं।
>> एमपी पुलिस ने ऐसी आशंका जताई थी कि राजस्थान, गुजरात सहित कई जगह बड़ी आतंकी कार्रवाई हो सकती है?
वहां की पुलिस ने यह तो खुलासा नहीं किया था कि जयपुर में ब्लास्ट होंगे।
>> इसका मतलब तो यह हुआ कि बाहर की पुलिस आपको सूचना देती कि आपके राज्य में फलां जगह कोई ब्लास्ट करेगा, तब आप उनको पकड़ते?
नहीं, मेरा मतलब यह नहीं है। आप जबरन मुझसे यह बात कहलवाना चाहते हैं।
>> जिस आरोपी को पकड़ा है उसका नाम तो नागौरी ने जयपुर ब्लास्ट से एक माह पहले ही बता दिया था?
मैंने न रिपोर्ट देखी और न पढ़ी। इस बारे में मैं कुछ भी नहीं कहूंगा। रिकॉर्ड देखकर ही कुछ बता सकता हूं।
..और शाम को साढ़े 6 बजे फिर लगाया फोन
>> क्या आपने रिकॉर्ड से रिपोर्ट देखी?
हां देख ली है, मप्र और राजस्थान पुलिस की संयुक्त पूछताछ रिपोर्ट है।
>> रिपोर्ट में सभी राज्यों के सिमी सरगनाओं और सक्रिय लोगों के नाम-पते दिए हुए हैं, आपको पता है?
नागौरी व साथियों ने पूछताछ में सिमी संगठन की मीटिंगों में आने वाले कुछ लोगों के नाम बताए थे।
>> उसने जयपुर को छलनी करने वाले शाहबाज और साजिद मंसूरी का नाम बताया था?
हां, दोनों के नाम थे। और भी कई लोगों के नाम थे, लेकिन उसने नहीं बताया कि वे लोग जयपुर में ब्लास्ट करेंगे।
>> मतलब अगर नागौरी कहता कि जयपुर में ब्लास्ट करेंगे तब ही उसके साथियों को पकड़ते?
नहीं, हम कोशिश कर रहे थे। पकड़ने के लिए ही तो नागौरी से पूछताछ के लिए वहां टीम भेजी थी।
>> ब्लास्ट के सवा तीन माह बाद भी आपने उस रिपोर्ट को नहीं देखा, तो इसमें लापरवाही किसकी है?
जांच कर रहे हैं। किसी की लापरवाही नहीं है। जांच में इस रिपोर्ट को भी लिया गया था।