इंदौर. यह काम तो नगर निगम का है, आपको क्या पड़ी है.. जैसा चलता है चलने दो.. ये जुमले आमतौर पर सुनने को मिलते हैं। लोकमान्यनगर की महिलाओं की जिद और जज्बे ने यह ढर्रा ही बदल डाला। अब वहां के आठ सौ परिवार घर-घर से कचरा जुटाने के लिए निगम पर निर्भर नहीं। बगीचा भी खुद ही विकसित कर मिसाल कायम की है।
इसके लिए गठित टीम को उत्कर्ष सेवा समिति नाम दिया गया जिसका उद्देश्य ही कॉलोनी का उत्कर्ष करना है। वार्ड-55 की महाराष्ट्रीयन बहुल इस कॉलोनी के आठ सौ परिवारों में से कोई सड़क पर कचरा नहीं डालता।
अध्यक्ष उषा वैशंपायन बताती हैं शुरुआत में हमें भी लोगों ने कहा यह तो निगम का काम है, आपको क्या करना। फिर भी अच्छे लोगों का साथ मिला और सिलसिला चल पड़ा। अब निगम का मुंह देखना ही नहीं पड़ता। जरूरी सहयोग भी मिल जाता है। पहले पार्षद अभय गद्रे और अब पराग लोंढ़े समिति की हरसंभव मदद कर रहे हैं।
ऐसे हुई शुरुआत
2 अक्टूबर १९९४ को कॉलोनी के एक घर में 12 महिलाओं की किटी पार्टी थी। उस घर के सामने कचरे का अंबार देख सभी दु:खी हुईं। वहीं वंदना बापट बोली निगम को क्यों कोसें? हम ही क्यों न करें? इसी जिद से बने 6-6 के दो दल और घर-घर जाकर महिलाओं से पूछा क्या वे सहयोग देंगी? शुरुआत 10 रुपए महीना सहयोग रशि से हुई और 40 महिलाएं तैयार हो गईं।
ऐसे जुटे संसाधन
फिर संसाधनों की जरूरत पड़ी तो लोकमान्यनगर गृह निर्माण सोसायटी ने 10 हजार रुपए की सहायता कर दी। इससे कचरा गाड़ी, गेंती, फावड़े, तगारी खरीदी और काम शुरू। सहयोग राशि भी 10 से 15 होते हुए 20 रुपए हो गई। इससे कॉलोनी में ८ कर्मचारी काम कर रहे हैं। हर गली का जिम्मा वहीं की कार्यकर्ता के पास है।
खाली मैदान पर महकी हरियाली
कचरे की समस्या सुलझी तो बगीचे के प्लॉट पर ध्यान गया। 300 गुणा 480 फीट के प्लॉट में बड़ा गड्ढा था जिसमें बारिश का पानी जमा होता और मच्छर, मेंढक, सूअर व अन्य पशु पनाह पाते थे। उसे समिति ने गोद लिया और घर-घर से पौधे इकट्ठे कर रोप दिए।
विधायक रहते लक्ष्मणसिंह गौड़ ने ट्रैक व निगम ने बाउंड्रीवॉल बनवाई और पार्षद ने लाइट लगवा दी। कॉलोनी के पुराने कुएं के पानी का उपयोग करने के लिए पाइप लाइन डाली जिसके लिए सदस्यों ने एक-एक हजार रुपए जुटाए। इसी पानी से बगीचा पनपा और गड्ढेनुमा प्लॉट फूलों से महकने लगा। सुबह योगा और शाम को वॉकिंग की जगह मिल गई। समिति ने केंचुए की खाद के लिए भी बगीचे में ही प्लांट बना लिया।
यहां भी हो रही है शुरूआत
पार्षद श्री लोंढ़े ने बताया सैफीनगर में भी इसी तरह काम चल रहा है। न्यू सैफीनगर, पैलेस कालोनी, स्कीम-101, त्रिवेणी कालोनी, वीर सावरकरनगर व रुपरामनगर के कुछ क्षेत्रों में भी शुरुआत कर दी है। मल्टियां होने से कुछ जगह समस्या आती है। फिर भी जल्दी ही यह कवायद वार्ड की कुछ और बस्तियों में होगी।