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थोक में एडमिशन

रायपुर. माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने पिछले शिक्षा सत्र में नियमों को ताक में रखकर थोक में एडमिशन देने वाले चार प्राइवेट स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी है।

गुरुवार को माशिमं की मान्यता समिति ने इन स्कूलों में ताला लगाने के फैसले पर मुहर लगाई। इनमें रायपुर जिले के तीन और जांजगीर का एक स्कूल है। समिति ने प्रवेश नीति का उल्लंघन करने वाले अन्य 37 स्कूलों पर महज जुर्माना ठोंका।

37 स्कूलों पर केवल जुर्माने को लेकर महकमे में चर्चा है। इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है, बोर्ड के आला अफसर इस फैसले से सहमत नहीं थे। उनकी मंशा प्रवेश नीति का उल्लंघन करने वाले तमाम प्राइवेट स्कूलों की मान्यता समाप्त करने की थी।

उच्चस्तर पर दबाव पड़ने के बाद प्रवेश के गोलमाल में फंसे स्कूलों को बचाने के लिए पेंच निकाले गए। अब फैसला लेने के बाद तर्क दिया जा रहा है कि जिन स्कूलों पर जुर्माना ठोंका गया है, उनमें से कुछ ने निर्धारित मापदंडों से दो-तीन या 8-10 ज्यादा विद्यार्थियों को ही एडमिशन दिया था।

स्कूल प्रबंधकों ने गलती के लिए क्षमा मांग ली है। इस वजह से उन्हें एक मौका दिया गया। इस बारे में बोर्ड के डिप्टी सेक्रेटरी पीके पांडे ने बताया कि समिति ने जुर्माना तय करने के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन को चेतावनी भी दी है।

माशिमं की सभाहाल में गुरुवार को मान्यता समिति की बैठक चेयरमैन बीकेएस रे की अध्यक्षता में हुई। बैठक में पूरे राज्य की 41 ऐसे स्कूलों की मान्यता पर विचार किया गया, जिन्होंने माशिमं की अनुमति के बिना निर्धारित मापदंडों के विपरीत थोक में विद्यार्थियों को दाखिला दे दिया था। करीब दो घंटे तक मंथन के बाद स्कूलों पर कार्रवाई तय की गई।

ब्लैक लिस्टेड स्कूलों पर गाज
रायपुर जिले के जिन तीनों स्कूलों महामाया उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नगेड़ा, राजमति उमावि साबर और एसएन उमावि भंवरीद सामूहिक नकल के लिए विख्यात कसडोल और बिलाईगढ़ विकासखंड में हैं। पिछले वर्ष बोर्ड परीक्षा के दौरान तीनों स्कूलों में सामूहिक नकल के केस पकड़े गए थे।

जांजगीर जिले के जिस स्कूल की मान्यता रद्द की गई है, उस स्कूल के प्रबंधन ने बोर्ड की एक भी नोटिस का जवाब नहीं दिया था। यहां बताना लाजमी है कि जितने स्कूलों पर जुर्माना किया गया है, उनमें 90 फीसदी स्कूल रायपुर और जांजगीर जिले के हैं। बिलासपुर और कोरबा के एक-दो स्कूल हैं।





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