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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
एयरफोर्स, छत्तीसगढ़ पुलिस तथा विमानन एजेंसियों ने बस्तर इलाके में 25 दिन पहले लापता हुए रैन एयर (रेनबैक्सी दवा कंपनी से संबद्ध) के हेलिकाप्टर बेल-430 के लिए हवाई सर्चिग बंद कर दी।
करीब 200 घंटे की उड़ान के बाद सभी एजेंसियों ने स्पष्ट कर दिया कि अब ऊंचाई से हेलिकाप्टर नजर आना मुश्किल है। हजारों वर्ग किमी की खान छानती फोर्स और एयरक्राफ्ट ने इस अभियान को विश्व का अब तक का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट सर्चिग आपरेशन बना दिया है। डीजीपी विश्व रंजन ने बताया कि इससे पहले, इंडोनेशिया में अक्टूबर 2005 में गुम हेलिकाप्टर की तलाश 15 दिन तक चली थी। यह अब तक का रिकार्ड था।
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री रामविचार नेताम के लिए हायर किया गया रैन एयर का हेलिकाप्टर 3 अगस्त की दोपहर हैदराबाद से उड़ा। करीब 16 नाटिकल माइल्स की उड़ान के बाद एटीसी से उसका संपर्क टूट गया। इसे जगदलपुर से फ्यूल लेकर अंबिकापुर जाना था।
हेलिकाप्टर में चालक दल के कैप्टन वीपी सिंह और आर गौर के साथ दो टेक्नीशियन भी थे। उसी रात करीब 8 बजे डीजीपी ने हेलिकाप्टर को लापता मानकर सर्चिग शुरू करने के निर्देश दिए। अगले दिन से 20 अगस्त तक हैदराबाद, खम्मम, जगदलपुर और दंतेवाड़ा बेस स्टेशन से रोजाना औसतन दो हेलिकाप्टरों ने उड़ान भरी।
हवाई सर्चिग में छत्तीसगढ़ पुलिस, मध्यप्रदेश सरकार, रैन एयर और डीजीसीए के अलावा सेना के दो एमआई-8 हेलिकाप्टर भी लगाए गए। डीजीपी श्री रंजन ने बताया कि बस्तर के 18 हजार वर्ग किमी से ज्यादा घने जंगलों में फोर्स ने खुले इलाकों को छान मारा और सर्चिग बंद कर दी गई।
25 दिन के आपरेशन के बाद अब फोर्स के सामने जंगलों में पैदल घुसने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। श्री रंजन ने बताया कि यह काम कई चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 3000 वर्ग किमी इलाके को पांच-पांच वर्ग किमी के सेक्टर में बांटा गया है। फोर्स सेक्टर वाइज जंगल में घुसेगी।
इस इलाके की सर्चिग में लगभग एक महीना लगेगा। हेलिकाप्टर नहीं मिला तो बाकी इलाके को भी इसी तरह सेक्टर में बांटा जाएगा। डीजीपी ने दावा किया कि अब भी बस्तर के 25 थानों को एलर्ट रखा गया है। सीआरपीएफ, सीएएफ और एसटीएफ को मिलाकर 12 हजार से ज्यादा फोर्स हेलिकाप्टर की तलाश में लगी है। पुलिस मुख्यालय के कुछ अफसर यह पता लगाने में जुटे हैं कि विश्व के दुर्गम इलाकों में इस तरह की आपदा में राहत कार्य कैसे चलाए गए थे।
बड़े तलाशी अभियान
- अक्टूबर 2005 में इंडोनेशिया का हेलिकाप्टर पापुआ में लापता हुआ था। करीब 15 दिन तक जंगलों में तलाश करने के बाद जकार्ता के अफसरों ने अभियान बंद कर दिया।
- चीन के सियाचुन प्रांत के यिंगझिऊ शहर में सेना का बचाव हेलिकाप्टर लापता हो गया। इसमें 14 जख्मी लोग और चालक दल के 5 सदस्य थे। 10000 जवानों के साथ खोजबीन एक हफ्ते में बंद कर दी गई।
- नेपाल में काठमांडू से 600 किमी दूर ताप्लेजुंग शहर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए हेलिकाप्टर की सर्चिग तीन दिन चली। इसमें चालक दल और नेपाल के उच्चधिकारियों को मिलाकर 6 लोग थे।
- बालाघाट (मध्यप्रदेश) की माहुरखोदरा पहाड़ियों में जुलाई 2007 में गुम हुए हेलिकाप्टर की सघन सर्चिग चार दिन चली थी। हालांकि पांचवें दिन पहाड़ों पर ही इसका मलबा और मारे गए चार लोगों के शव मिल गए।
- अलास्का, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया में भी पिछले सात साल के दौरान हुई प्रमुख हेलिकाप्टर दुर्घटनाओं में सर्चिग एक हफ्ते से ज्यादा नहीं चली। हालांकि मलबा और शव स्थानीय लोगों की सूचना पर हादसे के एक-एक माह बाद तक मिले।
विमानपत्तन प्राधिकरण की जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ के एक आला पुलिस अफसर ने दावा किया कि सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट सेक्शन-4 और एरोड्रम स्टैंडर्ड एंड एयर ट्रैफिक सर्विस रूल के तहत सर्च एंड रेस्क्यू (राहत और बचाव) उपबंध की धारा 2.11 में साफ तौर पर कहा गया है कि कोई भी एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त होता है तो इसकी तलाश विमानपत्तन प्राधिकरण को अन्य एजेंसियों के सहयोग से करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि हैदराबाद एयरपोर्ट अथारिटी से अब तक बेहद औपचारिक लहजे में छत्तीसगढ़ पुलिस से यही पूछा जाता है कि क्या चल रहा है।
परिजन असंतुष्ट
लापता पायलट कैप्टन वीपी सिंह के बेटे स्क्वाड्रन लीडर एपी सिंह तथा पायलट आर गौर के भाई डा. नरेश गौर छत्तीसगढ़ पुलिस के तलाशी अभियान से असंतुष्ट हैं। वे इस बात पर कायम है कि हेलिकाप्टर को ढूंढ़ने के लिए फोर्स जंगल में जाने से डर रही है।
कुछ इलाकों में फोर्स अब तक नहीं घुसी। उन्होंने दैनिक भास्कर से फोन पर कहा कि बस्तर के जंगलों में शासन-प्रशासन की पकड़ नहीं है। पुलिस तलाशी नहीं कर रही है, बल्कि इस इंतजार में है कि कोई पक्की खबर दे तो भारी-भरकम फोर्स के साथ जाकर हेलिकाप्टर बरामद कर लिया जाए। उन्होंने इस दावे को भी गलत बताया कि सर्चिग में 12000 से ज्यादा जवान लगे हैं। उन्होंने कहा कि बमुश्किल एक हजार जवान हैं, जिनमें से सर्चिग के लिए सौ-दो सौ से ज्यादा जंगल में नहीं जाते।