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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur धमतरी.
शहर के रामबाग इलाके में 70 साल से ज्यादा पुराने मकान की खुदाई में गुरुवार शाम 5 बजे अजीब आकृति के जानवर का शव मिला है।
जानवर को देखकर स्थानीय फारेस्ट अधिकारी भी हैरत में हैं, क्योंकि ऐसे किसी प्रजाति का रिकार्ड उनके पास नहीं है। जानवर की तस्वीरों के साथ पूरी जानकारी शुक्रवार को रायपुर भेजी जाएगी, ताकि उसके बारे में सही स्थिति का पता चले।
विंध्यवासिनी मंदिर के पास यह मकान निर्माण कार्य के लिए गिट्टी और रेती सप्लाई का काम करने वाले राजेश शर्मा के पिता डोमानप्रसाद शर्मा ने करीब 70 साल पहले तैयार करवाया था। उस दिनों रामबाग इलाके में घना जंगल हुआ करता था। पुराने मकान को तोड़ने का काम पिछले कुछ दिनों से चल रहा है।
गुरुवार को नींव की खुदाई के समय दीवार के बीच मजदूरों को कुछ चीज दिखी। उन्होंने तुरंत राजेश को सूचना दी। मजदूरों ने दीवार के इस हिस्से को बड़ी सावधानी से तोड़ना शुरू किया और उसके बाद जो सामने आया, उसे देखकर सब चौंक गए। दीवार के बीच गड्ढे जैसे हिस्से में जानवर का पूरी तरह से सूखा शव फंसा था।
डायनासोर जैसा आकार
कुछ-कुछ डायनासोर जैसे आकार वाले जानवर को देखने वहां भीड़ लग गई। एक व्यक्ति ने पांच सौ रुपए में इसे खरीदने की पेशकश भी की, लेकिन राजेश को लगा कि जानवर सामान्य नहीं है। जानवर के शरीर को उठाकर वह घर से कुछ ही दूर स्थित फारेस्ट दफ्तर पहुंच गए। वहां रेंजर आनंद कुरेदिया और शंकर सिंह वर्मा भी जानवर को देख चौंक गए।
कई सालों से वन विभाग में नौकरी कर रहे कुरेदिया ने भास्कर को बताया कि इस प्रजाति के जानवर की मौजूदगी का कोई रिकार्ड उनकी जानकारी में नहीं है। कबरबिज्जू, बंदर या गोह से यह जानवर एकदम अलग है। उसके पिछले पैर काफी लंबे हैं और जांघ का हिस्सा बहुत मजबूत दिखता है। पतली पूंछ शरीर के आकार से ज्यादा लंबी है। इस तरह का कोई जानवर धमतरी जिले में कभी नहीं मिला। न ही ऐसा कोई रिकार्ड विभाग के पास है।
शव वयस्क प्राणी का नहीं
कुरेदिया का कहना है कि यह शव वयस्क प्राणी का नहीं, बल्कि बच्चे का लगता है। इसके दांत बहुत ज्यादा मजबूत हैं और पिछले पैर के पंजे कंगारू की तरह हैं। 70 साल से भी ज्यादा समय तक दीवार के बीच फंसे रहने के बावजूद शरीर को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। उसकी मोटी चमड़ी सूखकर हड्डियों के ढांचे से बिल्कुल चिपक गई है।
माना जा रहा है कि दीवार के अंदर एयरटाइट कंडीशन होने के कारण शरीर मौत के बाद सड़ने की जगह सूखता चला गया। फारेस्ट विभाग का अनुमान है कि प्राणी विलुप्त हो चुकी किसी प्रजाति का हो सकता है।
प्राणी के बारे में विस्तार से जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। फिलहाल जानवर के शव को विभाग के धनवंतरि संग्रहालय में कांच के एयरटाइट बाक्स में रखा गया है, ताकि उसके शरीर को किसी तरह की क्षति न पहुंचे।