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महंगाई नरम, बाजार गरम

मुंबई. देश के शेयर बाजारों को सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में शुक्रवार को महंगाई में नरमी के रूप में दिशा सूचक मिल गया। रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में इजाफा न करने की उम्मीद में निवेशकों ने शुक्रवार को चौतरफा खरीदी की।

सेंसेक्स जहां 516 अंक उछलकर 14,565 पर बंद हुआ। निफ्टी ने 146 की उछाल भरी और यह 4,360 के स्तर पर बंद हुआ।

क्या वजह
>> अर्थव्यवस्था के पहली तिमाही के आंकड़ों में जीडीपी 8 फीसदी से मामूली घटकर 7.9 फीसदी पर आया। बाजार ने अनदेखा कर दिया।
>> निवेशकों ने महंगाई में गिरावट को अधिक महत्व दिया। गुरुवार को जारी हुए महंगाई के आंकड़ों में 16 अगस्त को समाप्त सप्ताह में मुद्रास्फीति की दर 0.23 फीसदी घटकर 12.40 फीसदी रह गई थी।
>> क्रूड की कीमतों में नरमी की खबरों से अमेरिकी बाजार सवा से दो फीसदी के बीच बढ़त के साथ बंद हुए। एशिया व यूरोप के बाजार भी मजबूत थे।

क्या हुआ
बैंक, रियल्टी, पीएसयू, मेटल, पावर, कैपिटल गुड्स आदि शेयरों में खरीदी का जोर बने रहने से दिनभर बढ़ना जारी रहा । शाम को सेंसेक्स 3.67 फीसदी उछलकर बंद हुआ।

क्या करें निवेशक
>> निवेश सलाहकार फर्म मॉर्गन स्टेनली ने सेंसेक्स की अस्थिरता 15 साल की ऊंचाई पर होने को देखते हुए निवेशकों को ज्यादा उत्साह न दिखाने की सलाह दी है।
>> एडेलवाइज कैपिटल के टेक्नीकल एनालिस्ट अभिजीत चक्रवर्ती की राय में विदेशी बाजारों से नकारात्मक संकेत नही मिलते हैं तो बाजार में 6-7 फीसदी की बढ़त दिखाई दे सकती है।
>> एनविजन कैपिटल के सीईओ नीलेश शाह का मानना है कि बाजार ओवर सोल्ड हो चुका था इसलिए खरीदी निकली है। सेंसेक्स 13,500 से नीचे जाने की उम्मीद नहीं है।

ब्याज दरों से जुड़े शेयर उछले
बैंक शेयरों में शुक्रवार को भारी खरीदी निकली। बैंकेक्स सबसे अधिक 6.27 फीसदी उछलकर बंद हुआ। एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के शेयर ७.१९ से 5.09 फीसदी के बीच उछलकर बंद हुए। डीएलएफ में 5.35 फीसदी उछाल की बदौलत रियल्टी इंडेक्स में 5.10 फीसदी की दूसरे सबसे अधिक बढ़त दर्ज हुई।

मुख्य बिंदु
>> महंगाई के आंकड़े बाजार की उम्मीद से कम आने से धारणा में आई मजबूती।
>> ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील बैंक, रियल्टी, पीएसयू, मेटल, पावर और कैपिटल गुड्स आदि शेयरों में निकली खरीदी।
>> सेंसेक्स में 500 अंक से अधिक उछाल के बावजूद एफआईआई 364.61 करोड़ के शुद्ध बिकवाल रहे।

मौजूदा परिदृश्य में ब्याज दरें बढ़ने की आशंकाओं में कमी आई है। काफी लंबे समय के बाद महंगाई में कमी आने की उम्मीदें बढ़ीं हैं।
- के.के. मित्तल, हेड आफ पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज, ग्लोब कैपिटल

सभी को विकास की रफ्तार धीमी होने का अनुमान पहले से था, इसलिए यह 8 फीसदी रहे या 7.9 फीसदी कोई फर्क नहीं पड़ता है।
- गजेंद्र नागपाल, सीईओ, यूनिकॉन फाइनेंशियल





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