मुंबई. आयातकों व निर्यातकों को रुपए में आने वाले तेज उतार-चढ़ाव से निपटने का एक रास्ता मिल गया है। भारत में शुक्रवार को मुद्रा बाजार का वायदा कारोबार (करेंसी फ्यूचर) शुरू हो गया है। कारोबारी अब मुद्रा में तेज उतार चढ़ाव के विपरीत असर से अपने कामकाज को बचा सकेंगे।
क्यों पड़ी जरूरत: पिछले एक साल में रुपया जहां दशक के सबसे ऊपरी स्तर पर गया वहीं 17 माह के न्यूनतम स्तर पर भी चला गया। रिजर्व बैंक भी अपनी एक रिपोर्ट में कह चुका है कि विनिमय दर में अत्यधित हलचल के कारण कंपनियों की बैलेंस शीट पर असर पड़ सकता है।
15-25 फीसदी हर साल: मुद्रा में वायदा सौदे शुरू होने के पहले मिनट में 5,000 से ज्यादा सौदे हुए। पहला सौदा 44.1500 रुपए प्रति डालर के भाव पर हुआ। अनुमान है कि करेंसी फ्यूचर बाजार एक साल में ही 15-25 फीसदी तक बढ़ सकता है। एनएसई के सीईओ रवि नारायण का कहना है कि धीमी शुरूआत होने के बाद भी करेंसी फ्यूचर का रोजाना कारोबार 35 अरब डॉलर का हो सकता है।
300 से ज्यादा सदस्या और 11 बैंक: एनएसई के सूत्रों के मुताबिक एक्सचेंज के 300 से अधिक सदस्यों और 11 बैंकों ने मुद्रा में वायदा कारोबार के खंड में उतरने और ट्रेडिंग के लिए लिए पंजीकरण कराया है।
एफआईआई, एनआरआई: वित्त मंत्री चिदंबरम ने एफआईआई और अनिवासी भारतीयों को भी करेंसी फ्यूचर में कारोबार की अनुमति दिए जाने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि इंटेरेस्ट रेट डेरिवेटिव, क्रेडिट डेरिवेटिव भी शुरू करने चाहिए।
करेंसी फ्यूचर का पहला सत्र संतोषजनक रहा। आने वाले समय में यह कितनी गति पकड़ेगा। अभी यह शुरुआती चरण में है। निवेशकों को इस बारे में शिक्षित किए जाने की जरूरत है।
- सतीश नायक, चीफ फाइनेंशियल आफीसर, सेंट्रम डायरेक्ट