नई दिल्ली/भुवनेश्वर. उड़ीसा में विहिप नेता की हत्या के बाद हुई हिंसा के विरोध में शुक्रवार को देशभर में चर्च द्वारा संचालित हजारों स्कूल-कॉलेज बंद रहे। उधर, उड़ीसा के कंधमाल जिले में स्थिति में सुधार के बाद कर्फ्यू में 10 घंटे की छूट दी गई है।
हिंसा के बाद जंगलों में शरण लेने वाले लोग भी लौटने लगे हैं। मुंबई में ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के अध्यक्ष जोसेफ डीसूजा ने दावा किया कि देशभर में 30 हजार शिक्षण संस्थाएं बंद रहीं। चर्चो में शांति व एकता के लिए प्रार्थनाएं की गई।
मुंबई में बैठक के बाद 12 हजार अतिरिक्त रोमन कैथोलिक शिक्षण संस्थान बंद में शामिल हुए। इस मौके पर आर्क बिशप ओसवाल्ड गैसियाज ने शांति की अपील की। आजाद मैदान पर आयोजित रैली में फिल्मकार महेश भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी, अब्राहम मथाई जैसे गणमान्य लोगों तथा विभिन्न समुदायों के संगठनों ने भाग लिया।
इस बीच, भुवनेश्वर में डीआईजी आरपी कोचे ने स्थिति नियंत्रण में होने का दावा करते हुए कहा कि गुरुवार से हिंसा की किसी ताजा घटना की सूचना नहीं है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक फिरिंगिया और सारंगागढ़ से दो शव मिले हैं। इसके साथ हिंसा में मरने वालों की संख्या 12 हो गई है।
कंधमाल के कलेक्टर कृष्ण कुमार ने बताया कि हिंसा की वजह से जंगलों में शरण लेने वाले लोग वापस लौटने लगे हैं। जिले में सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक कफ्यरू में ढील दी गई है। दूसरी ओर फुलबनी, बालीगुडा, तुमुदिबंधा, बरखामा, रैकिया, जी उदयगिरि, दरिंगबाड़ी, तिकाबाली और कुछ अन्य संवेदनशील इलाकों में अभी भी कफ्यरू जारी है। राज्य में केंद्र ने सुरक्षाबलों और राहत कार्यो के लिए दो हेलीकाप्टर भी भेजे हैं।
केंद्र सीबीआई जांच के पक्ष में
केंद्र सरकार ने उड़ीसा में जातीय हिंसा पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि वह इस पूरे मामले की सीबीआई जांच के पक्ष में है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को पत्रकारों से नई दिल्ली में कहा, ‘हमारा मानना है कि यह मुद्दा जांच के लिए सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए, क्योंकि न्यायिक जांच में देर लगेगी।’
‘भाजपा नवीन पटनायक सरकार से समर्थन वापस नहीं लेगी।’
- मुख्तार अब्बास नकवी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा (बेंगलूर में)
‘समुदाय विशेष के विरुद्ध इस तरह की कायराना हरकत देश को कलंकित करने वाली है। केंद्र व उड़ीसा सरकार को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।’
- जयललिता, अध्यक्ष, एआईएडीएमके (चेन्नई में जारी बयान में)