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उद्योगपति के के बिड़ला नहीं रहे

कोलकत्ता. जानेमाने उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद कृष्ण कुमार बिड़ला का शनिवार को यहां अल्प बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। के के बाबू के नाम से पहचाने जाने वाले श्री बिड़ला पिछले कुछ समय से बीमार थे। शनिवार को सुबह साढ़े सात बजे उन्होंने अपने निवास ‘बिड़ला पार्क’ में अंतिम सांस ली। उस समय उनके भाई बीके बिड़ला और तीनों पुत्रियां व दामाद वहीं मौजूद थे। उनका अंतिम संस्कार स्थानीय श्मशान घाट केवरातला में किया जाएगा। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उनकी पत्नी मनोरमा देवी बिड़ला का निधन एक माह पहले ही हुआ था।

के के बिड़ला के निधन की सूचना मिलते ही पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने उनके निवास पहुंच कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि देश ने एक ख्यात और बहुमुखी व्यक्तित्व को खो दिया है।

बिड़ला समूह की अनेक कंपनियों के चेयरमैन के के बिड़ला वर्ष 1984 से 2002 के बीच तीन बार राज्यसभा सदस्य चुने गए। उनके औद्योगिक समूह में चीनी, उर्वरक, केमिकल, हेवी इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, शिपिंग और न्यूजपेपर जैसे कई प्रमुख उद्योग शामिल हैं।

जीवन परिचय:

भारत के सबसे पहले व्यावसायिक घरानों में से एक बिड़ला उद्योग के पुरोधा घनश्याम दास बिड़ला के पुत्र कृष्ण कुमार बिड़ला का जन्म राजस्थान के पिलानी में 11 नवंबर 1918 को हुआ था। वे भारतीय चीनी उद्योग के संस्थापकों में से एक थे। 1940 में वे चीनी उद्योग से जुड़े।

एक उद्योगपति होने के अलावा केके बिड़ला राज्यसभा सांसद, समाजसेवी, विद्वान और कुशल रणनीतिकार भी थे। 1984 में आजीवन सदस्य के रूप में कांग्रेस पार्टी से जुड़े और 18 वर्ष तक राज्यसभा सदस्य रहे।

1961 में वे कोलकाता के शेरिफ चुने गए। 1997 में उन्हें पांडिचेरी विश्वविद्यालय द्वारा ‘डॉक्टर आफ लेटर्स’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। वे इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन, फेडरेशन आफ इंडियन चेम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और इंडियन चेम्बर आफ कामर्स (आईसीसी) जैसे कई उद्योग परिसंघों के अध्यक्ष रहे।

1984 तक वे बिड़ला इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी एंड साइंस के चेयरमैन रहे।

1991 में उन्होंने के के बिड़ला फाउंडेशन की स्थापना की। यह फाउंडेशन भारतीय साहित्य, वैज्ञानिक शोध, भारतीय दर्शन, कला, संस्कृति और खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सालाना पुरस्कार प्रदान करता है।

बिड़ला ने विज्ञान, इतिहास और सांस्कृतिक विषयों पर शोध के लिए के के बिड़ला अकादमी भी स्थापित की। फुरसत के क्षणों में उन्हें अध्ययन, संगीत सुनना और ताश खेलना पसंद था। वे कई साल तक ब्रिज फाउंडेशन आफ इंडिया और लान टेनिस एसोसिएशन के प्रेसीडेंट भी रहे।





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