नई दिल्ली. एक ही व्यक्ति अपनी कंपनी शुरू कर सकेगा और न्यूनतम पेडअप कैपिटल की कोई सीमा नहीं होगी। बोर्ड में 33 फीसदी स्वतंत्र निदेशक भी रह सकेंगे।
ऐसे व्यापक बदलाव वाले नए कंपनी विधेयक को कैबिनेट ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी है। करीब सात लाख कंपनियों का नियमन करने वाला यह बिल अक्टूबर में संसद में पेश होने की संभावना है।
बिल में यह कोशिश की गई है कि कंपनियां खुद अपना नियमन (रेगुलेशन) करें। कंपनी अधिनियम 2008 मौजूदा कंपनी अधिनियम 1956 का स्थान लेगा। इसमें 33 फीसदी स्वतंत्र निदेशकों की बोर्ड में नियुक्ति, फर्मो द्वारा जनता से डिपाजिट लेने पर रोक, एक व्यक्ति द्वारा कंपनी रजिस्टर कराने जैसे कई विकल्प शामिल किए जाएंगे। क्यों किए बदलाव: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि मौजूदा कानून समय के हिसाब से नहीं चल रहा है। नया कानून क्रांतिकारी बदलाव ला देगा।
ईरानी कमेटी का काम: जेजे ईरानी की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र कमेटी ने कंपनी अधिनियम का मसौदा तैयार करने में अहम भूमिका अदा की है। कापरेरेट मामलों के संयुक्त सचिव जितेश खोसला का कहना है कि नए बिल में सरकारी हस्तक्षेप की बजाय शेयरधारकों के नियंत्रण को महत्व दिया जाएगा। सरकारी वक्तव्य में कहा गया है कि नए बिल में देश के कंपनी जगत को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मापदंडों के तहत संचालित करने के प्रयास किए जाएंगे।
हवाई अड्डों पर शुल्कों का नियमन करेगी अथारिटी : हवाई अड्डे पर लैंडिंग, पार्किग, कम्युनिकेशन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल जैसी सुविधाओं के शुल्कों का निर्धारण एक अथारिटी करेगी। साथ ही हवाई अड्डों पर ईंधन मुहैया कराने की बुनियादी संरचना को भी इसी अथारिटी के तहत लाया जाएगा।
कैबिनेट ने हवाई अड्डों पर दरों के निर्धारण और ईंधन आपूर्ति करने वालों के बीच प्रतिस्पर्धा के लिए एक अथारिटी के गठन का फैसला किया है। अगले संसदीय सत्र में संशोधन विधेयक लाया जाएगा।
नई बातें, बड़े बदलाव
>> एक ही व्यक्ति कंपनी शुरू कर सकेगा। किसी भागीदारी फर्म और बैंकिंग कंपनी में भागीदारों की संख्या 100 तक हो सकेगी।
>> कंपनी शुरू करने के लिए न्यूनतम पैडअप कैपिटल का कोई नियम नहीं होगा।
>> सहायक कंपनियां बनाने की कोई सीमा नहीं होगी। डिस्काउंट पर शेयर जारी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अभी प्रवर्तक खुद को डिस्काउंट पर ही शेयर जारी कर लेते हैं।
-चीफ एक्जीक्यूटिव आफिसर, चीफ फाइनेंशियल आफिसर और कंपनी सचिव को प्रमुख प्रबंधक माना जाएगा।
-एक ही माध्यम से विलय और अधिग्रहण कराए जाएंगे।
-निवेशकों को शिक्षित करने व संरक्षण देने के लिए कानूनी तौर पर एक फंड मुहैया कराया जाएगा।
-अपराधों से निपटने के लिए अलग से एक कोर्ट का प्रावधान किया जाएगा।