नई दिल्ली. ऊंची ब्याज दरों के दबाव में वर्तमान वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की विकास दर पिछले तीन वर्र्षो के दौरान सर्वाधिक धीमी रही है। विशेषज्ञों के अनुसार महंगाई कम करने के प्रयासों के बीच इससे ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती थी।
क्या रहा अंतर : वित्त वर्ष 2008-09 की पहली तिमाही में देश की विकास दर ७.९ फीसदी दर्ज की गई है। पिछले वर्ष समान अवधि के दौरान यह ९.२ फीसदी थी। कहां पड़ा दबाव : महंगाई कम करने के प्रयासों के चलते रिजर्व बैंक व बाद में अन्य बैंकों द्वारा बढ़ाई र्गई ब्याज दरों से विकास का इंजन कहे जाने वाले उद्योगों को तेज झटका लगा है। मैन्यूफैक्चरिंग व पावर जेनेरेशन जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र कर्ज की लागत बढ़ जाने से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। उत्पादन हुआ आधा : मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का उत्पादन पिछले वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले आधा रह गया है। जहां पिछले वर्ष अप्रैल से जून के बीच 10.9 फीसदी उत्पादन हुआ था, वहीं इस वर्ष यह घट कर ५.६ फीसदी रह गया है।
सबसे धीमा इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर : केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के आंकड़ों के अनुसार इलेक्ट्रीसिटी, गैस व वाटर सेक्टर की विकास दर पिछले वर्ष के ७.९ से घटकर इस वर्ष मात्र २.६ फीसदी रह गई है। कृषि क्षेत्र की विकास दर तीन फीसदी दर्ज की गई है।
निर्माण क्षेत्र में हुआ विकास : जहां अधिकतर क्षेत्रों से विकास की गति धीमी पड़ने के संकेत प्राप्त हुए, वहीं निर्माण क्षेत्र की दर ७.७ से बढ़कर ११.४ फीसदी पहुंच गई।
सही होगा वित्त मंत्री का दावा : विशेषज्ञों का मानना है कि जीडीपी में यही रुझान बरकरार रहे तो वित्त मंत्री, रिजर्व बैंक व प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार द्वारा पेश किए गए ७.७ से ८.७५ फीसदी के बीच वार्षिक विकास दर के अनुमानित आंकड़े सच साबित हो सकता है।
8 फीसदी रहेगी विकास दर
‘मुझे भरोसा है कि हर वर्ष की ही तरह इस बार भी हमारा जीडीपी दर का आंकलन सही बैठेगा। अर्थव्यवस्था करीब 8 फीसदी की दर से विकसित होगी।’
-पी. चिदंबरम, वित्त मंत्री
जैसा सोचा था
‘जैसा अनुमान था वैसा ही हुआ। मानसून बेहतर हुआ तो स्थितियों में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।’
-सौमित्र चौधरी,सदस्य, प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार समिति
कितना रहा जीडीपी?
वित्त वर्ष 2008-09 की पहली तिमाही के दौरान देश का जीडीपी 7,82,357 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि के दौरान यह 7,29,949 करोड़ रुपए था।