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बेकाबू हो जाएगा ट्रैफिक

भोपाल. राजधानी का बेतरतीब ट्रैफिक वर्ष 2020 तक बेकाबू हो जाएगा। वर्तमान में हर साल करीब तीन सौ लोग हर साल सड़क दुर्घटनाओं में मारे जा रहे हैं। ट्रैफिक को लेकर उदासीनता का यही हाल रहा तो अगले 12 सालों में यह संख्या बढ़कर करीब एक हजार हो जाएगी।

राजधानी में उपलब्ध ट्रैफिक पुलिस का अमला यह साबित करता है कि ट्रैफिक सुधार के लिए प्रशासन कितना सजग है। यातायात नियंत्रण के लिए 702 पुलिसकर्मियों की आवश्यकता है और उपलब्ध बल की संख्या मात्र 233 है। इस बल की स्वीकृति 24 साल पुरानी है। आज वाहनों की संख्या चार गुना बढ़ गई है।

राजधानी के क्षेत्रफल में भी इजाफा हुआ है। ट्रैफिक पुलिस के एक अध्ययन के मुताबिक 1956 का 71 वर्गमीटर का क्षेत्र बढ़कर 2006 में 284 वर्गमीटर हो गया, जिसके 2020 में 370 वर्गमीटर हो जाने का अनुमान है। इसके अलावा राजधानी की आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। इसका एक बड़ा कारण बाहर से आने वालों को यहां की आबोहवा पसंद आना है। 2001 में भोपाल की जनसंख्या 14.5 लाख थी।

2020 में इसके 27 से 30 लाख हो जाने का अनुमान है। राजधानी में दौड़ रहे वाहनों की संख्या में भी बेतहाशा वद्धि हुई है। 2006 में जहां 4 लाख दोपहिया वाहन थे वह 2020 में 12 लाख हो जाएंगे। अगर पार्किग स्थलों की बात की जाए तो भी स्थिति गंभीर है। शहर में इस समय मात्र डेढ़ हजार चार पहिया वाहनों के लिए पार्किग स्थल हरं। 2020 में सात हजार चार पहिया वाहनों के लिए पार्किग स्थल की जरूरत होगी।

शहर में दोपहिया वाहनों के लिए दस हजार पार्किग स्थल हैं, 2020 में सुचारू व्यवस्था के लिए 25 हजार पार्किग स्थलों की जरूरत होगी। मुख्य रेलवे स्टेशन पर आज दो हजार वाहन खड़े हो सकते हैं। 12 साल बाद यहां पांच हजार वाहन खड़े होने लायक जगह की जरूरत होगी। हबीबगंज स्टेशन पर 1200 वाहनों की पार्किग है। 2020 तक यहां भी पांच हजार वाहनों के पार्किग की व्यवस्था होना चाहिए।

सिटी रेल ठंडे बस्ते में
यातायात में सुधार के लिए तत्काल सिटी रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाया जाना चाहिए। यह प्रस्ताव दो सालों से धूल खा रहा है। इसमें मिसरोद से बैरागढ़ के बीच लोकल ट्रेन चलाई जाना प्रस्तावित है।

स्टापेज बीयू, हबीबगंज स्टेशन, एमपी नगर, बरखेड़ी, मुख्य रेलवे स्टेशन, भानपुर, निशातपुरा, एयरपोर्ट रेलवे क्रॉसिंग पर होंगे। इससे विशेषकर पुराने भोपाल में ट्रैफिक की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

यदि ट्रैफिक सुधार की दिशा में तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले पांच सालों में स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल हो जाएगी।
-वीके पवार, एडीजी ट्रैफिक

शहर में ट्रैफिक प्लान करने के लिए हाईपॉवर कमेटी बनाना चाहिए। विभागों में आपसी तालमेल नहीं हो पाने से यातायात की समस्याएं हल नहीं हो पातीं।
-एसएस लल्ली, डीएसपी ट्रैफिक

सुधार के उपाय
>> यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए सबसे पहले पुलिस बल की कमी दूर होना चाहिए।
>> ट्रैफिक इंटेलीजेंस ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर तत्काल अमल किया जाना चाहिए।
>> बाटल नेक सड़क पर फ्लाईओवर बनाया जाए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुविधाजनक बेहतर और आसान बनाया जाए ताकि लोग वाहनों की जगह इसका इस्तेमाल कर सकें।
>> कम स्थान को देखते हुए मल्टीलेवल पार्किग प्लेस बनाए जाएं।
>> नियमों का उल्लंघन रोकने सिर्फ नंबर नोट कर चालान बनाए जाएं जिसकी जुर्माना राशि अदालत में जमा हो। इससे चैकिंग के दौरान सड़क पर लगने वाली वाहनों की भीड़ से निजात मिलेगी और अदालती जुर्माने के भय से जनता भी नियमों के प्रति जागरूक होगी।





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