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सब्सिडी वाले डीजल पर रोक

भोपाल. राजधानी में डीजल की किल्लत को कम करने के लिए फूड कमिश्नर ने बगैर वाहनों के डीजल की बिक्री पर रोक लगा दी है। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं।

इन दिनों राजधानी में डीजल की किल्लत चल रही है। इसके पीछे कारण यह है कि औद्योगिक क्षेत्र की मशीनों और व्यवसायिक संस्थानों के जनरेटर की डीजल की जरूरत भी डीजल पंपों से पूरी की जा रही है, जो कि नियम विरुद्ध है।

नियमानुसार फैक्टरियों को तेल कंपनियों से सीधे डीजल खरीदना चाहिए, परंतु ऐसा हो नहीं रहा है। इसे रोकने के लिए फूड कमिश्नर ने कलेक्टर को पत्र लिखा है कि वे जिले के डीजल पंपों के स्टाक की जांच कराएं।

इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि पंपों को कितना डीजल दिया गया और उन्होंने कितना बेचा। यदि जरूरी हो तो तेल कंपनियों से चर्चा के बाद किसी एक डीजल पंप को निश्चित कर दिया जाए जहां से वाहनों के अलावा अन्य को डीजल दिया जा सके। पत्र में कहा गया है कि डीजल की कमी का असर वाहनों पर पड़ रहा है। वाहन चालकों को जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं मिल पा रहा है।

यह है मामला
वाहनों के उपयोग में आने वाले डीजल पर सरकार सब्सिडी देती है। वर्तमान में सब्सिडी वाले डीजल की कीमत 38.43 रुपए प्रति लीटर है। जबकि औद्योगिक उपयोग के लिए बगैर सब्सिडी वाले के डीजल की कीमत लगभग 52 रुपए है। इसलिए जनरेटर व मशीनों के लिए लोग सब्सिडी वाला डीजल खरीदने का प्रयास करते हैं।

20 प्रतिशत है कमी
तेल कंपनियों के अनुसार वर्तमान में भोपाल शहर में 150 से 200 किलोलीटर प्रतिदिन डीजल की बिक्री की जा रही है, जो कि खपत और आपूर्ति के लिहाज से लगभग 15 से 20 प्रतिशत कम है।

राजधानी के डीजल पंपों पर नजर रखने के लिए फूड कमिश्नर का पत्र प्राप्त हुआ है। इसी सप्ताह पंप संचालकों के स्टाक की जांच की जाएगी जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वे सब्सिडी वाला डीजल कहीं फैक्टरियों को तो नहीं बेच रहे हैं। अगर ऐसा पाया जाता है तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई होगी।
-मनीष रस्तोगी, कलेक्टर





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