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एकता सम्मेलन में बिखरे कांग्रेसी

भोपाल. छिंदवाड़ा में हुए कांग्रेस के एकता सम्मेलन ने प्रदेश के दिग्गज कांग्रेस नेताओं के एकता मंत्र की धज्जियां बिखेर दी हैं।

पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे सुभाष यादव द्वारा वरिष्ठ नेता कमलनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने की मांग और इस पर दिग्विजयसिंह के खुले समर्थन ने पार्टी में अंदरूनी तूफान पैदा कर दिया है। इस पूरे मामले को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी के खिलाफ खुली बगावत के रूप में लिया जा रहा है।

प्रदेश के क्षत्रपों के बीच अकेले पड़ गए पचौरी के समर्थन में आखिर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी नारायण सामी को आगे आना पड़ा है। सामी ने अप्रत्यक्ष तौर पर पचौरी का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा है कि प्रदेश में चुनाव लड़ने वाला नेता ही मुख्यमंत्री बने, ऐसा जरूरी नहीं है।

कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलामनबी आजाद का हवाला देते हुए सामी ने पचौरी की दावेदारी को सुरक्षित करने का प्रयास किया है। गौरतलब है कि आमतौर पर पचौरी की छवि मैदानी चुनाव लड़ने वाले नेता की नहीं है।

यादव ने इसलिए दिया कमलनाथ का प्रस्ताव

>> प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने के बाद यादव पार्टी में अपनी उपेक्षा से नाराज रहे। उनका आरोप है कि उनसे सलाह तक नहीं ली जा रही है। पचौरी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी में यादव समर्थकों को खास महत्व भी नहीं दिया।
>> हाईकमान की पसंद से प्रदेश अध्यक्ष बने पचौरी भावी मुख्यमंत्री के रूप में देखे गए, लेकिन कमलनाथ द्वारा बैतूल उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की कमान संभालने की इच्छा खुले तौर पर जाहिर करने से मामला गर्माया।

दिग्विजयसिंह ने समर्थन क्यों किया
हाल ही में प्रदेश कांग्रेस ने जिला इकाइयों से विधानसभा के उम्मीदवारों की सूची मंगवाई। दिग्विजयसिंह के क्षेत्र राजगढ़ से जिला अध्यक्षों ने लिख कर भेजा जो नाम राजा साहब तय करेंगे, वे ही उम्मीदवार होंगे। इस पर पचौरी ने जिला अध्यक्षों से कहा कि वे चाहें तो नामों का पैनल भेजें। उनकी सिफारिश गोपनीय रखी जाएगी। पचौरी के दोतरफा व्यवहार से दिग्विजयसिंह नाराज बताए जाते हैं।

कमलनाथ का अहसान चुकाना चाहते हैं
वर्ष 1993 के चुनाव के बाद दिग्विजयसिंह के पहली बार मुख्यमंत्री बनने में कमलनाथ की महत्वपूर्ण भूमिका थी। मुख्यमंत्री पद को लेकर श्यामाचरण शुक्ला तथा दिग्विजयसिंह के नाम पर पार्टी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में रायशुमारी हुई, तब कमलनाथ के सहयोगी विधायकों ने दिग्विजयसिंह के पक्ष में समर्थन जताया। पूरे ड्रामे में असहज पचौरी
भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश कांग्रेस की बागडोर संभालने वाले पचौरी इस पूरे घटनाक्रम से असहज हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में उन्होंने कमलनाथ समर्थक नेता को नारेबाजी के कारण थप्पड़ भी जमा दिया। पचौरी की चुनाव के बाद भूमिका क्या होगी, इसे लेकर अब पचौरी खेमा पसोपेश मे पड़ गया है।

हाईकमान के सामने रखेंगे मामला
पार्टी के प्रदेश प्रभारी नारायण सामी ने डीबी स्टार से चर्चा में कहा कि छिंदवाड़ा में हुए इस मामले को पार्टी हाईकमान तक पहुंचाया जाएगा। एंटोनी कमेटी ने तय किया है कि जहां पर भी चुनाव हो रहे हैं, वहां किसी भी नेता को मुख्यमंत्री के रूप में पेश नहीं किया जाएगा। वे इस मामले को पार्टी हाईकमान के सामने रखेंगे।

सिंधिया ने भी किया विरोध
प्रदेश के वरिष्ठ नेता तथा केंद्र में राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कमलनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने का विरोध किया तथा साफ-साफ कहा कि यह कांग्रेस की परंपरा नहीं है।

इनका कहना है
एकता सम्मेलन में कमलनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने का मेरा प्रस्ताव पूर्व नियोजित नहीं था। वहां पर कार्यकर्ताओं का जो भाव था उसी को मैंने खुले तौर पर इजहार किया।
- सुभाष यादव, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष





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