भोपाल.
शांत दिमाग, मुस्कराता चेहरा और कूल-कूल से दिखने वाले अभिनव बिंद्रा ने दैनिक भास्कर से अपनी सफलता पर खुलकर चर्चा की। चर्चा के मुख्य अंश इस तरह हैं-
प्र. -आपको देखकर कहा जाता है कि आप बहुत कूल-कूल रहते हैं।
अभिनव- मेरा खेल ही ऐसा है। जब आप खेल रहे होते हैं तो किसी भी तरह का शोर-शराबा नहीं होता। यह एक तरह से सेल्फ मोटिवेटेड खेल है। जब आप निशाना साधते हैं तो आपको अपने धड़कनों को भी नियंत्रित करना होता है। ऐसे में आपको बहुत रिलेक्स रहना पड़ता है। तो आपका व्यवहार भी कुछ-कुछ वैसा ही हो जाता है।
प्र -आपकी सफलता के बाद कहा जा रहा है कि गोल्ड से ‘गोल्ड’ आता है?
अभिनव- नहीं ऐसी बात नहीं है। सिर्फ सुविधाओं के सहारे आप मेडल नहीं जीत सकते। इसके लिए आपको इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। शूटिंग थोड़ा महंगा खेल है, इसलिए इसके बारे में यह कहा जाता है कि इसे आम आदमी नहीं खेल सकता, लेकिन जब तक आप प्रयास नहीं करेंगे, तब तक कुछ नहीं होगा।
प्र.-भारत में शूटिंग सुविधाओं के बारे में क्या कहेंगे?
अभिनव- दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले अभी तो हम कमजोर हैं। लेकिन धीरे-धीरे हमारे यहां भी सुविधाएं बढ़ रही हैं। जिस तरह से भोपाल में शूटिंग अकादमी की शुरुआत हुई है। अन्य जगह भी इस तरह की शुरुआत होनी चाहिए। इससे न सिर्फ हमारा आधारभूत ढांचा सुधरेगा, बल्कि हमें भविष्य में मैडल जीतने वाले खिलाड़ी भी मिलेंगे।
प्र. -आपके और शूटिंग एसोसिएशन के बारे में विवाद की खबरें भी आई थीं।
अभिनव- मेरा किसी के साथ कोई विवाद नहीं है। सभी समर्पित हैं। हम सब एक ही खेल से जुड़े हैं। इसलिए विवाद का सवाल ही पैदा नहीं होता।
प्र.-इस ओलिंपिक में चीन ने अमेरिकी वर्चस्व तोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया। चीन की इस सफलता का क्या कारण मानते हैं?
अभिनव-देखिए उनका इन्फ्रास्ट्रक्चर शानदार है। उन्होंने एक लक्ष्य तय किया और उस पर काम किया। उन्होंने यह मुकाम हासिल करने के लिए 20 साल पहले से तैयारी शुरू कर दी थी और इस ओलिंपिक में आकर उन्होंने इसे पूरा कर लिया।
प्र. -तो क्या चीन की तरह हमें भी अपनी टीम को पहले तैयार करना चाहिए फिर उन्हें ओलिंपिक में भेजना चाहिए?
अभिनव-ये बिल्कुल ठीक है कि हमें अपनी टीम तैयारी कर ही उतारनी चाहिए, लेकिन हमें ये भी याद रखना होगा कि हमें खिलाड़ियों को एक्सपोजर और अनुभव भी देना होगा। जब तक वह नहीं खेलेंगे, तब तक आप उनके जीतने के बारे में नहीं सोच सकते।
प्र.- आपने अनुभव की बात की। इस बार हमारे शूटिंग दल में समरेश जंग, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और मनशेर सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद थे, फिर भी हम पदक से चूक गए।
अभिनव- नहीं ऐसा नहीं है। हमारे सभी खिलाड़ी अच्छा खेले। उन्होंने मेहनत भी की थी और हमें और पदक मिल सकते थे, लेकिन कोई न कोई दिन आपका खराब होता है। हमारे खिलाड़ी जिस दिन हारे, उनका वह खराब दिन था।
प्र.-भोपाल में शूटिंग अकादमी और नए खिलाड़ियों के बारे में क्या कहेंगे?
अभिनव-इस तरह की अकादमी निश्चित रूप से भविष्य में अच्छे परिणाम देंगी। हमें खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधाओं में इजाफा करना होगा। आने वाले खिलाड़ियों के लिए यही कहना चाहूंगा कि किसी भी खेल में सफलता के लिए पहली शर्त मेहनत है।