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सब समझेंगे जंतर-मंतर

जयपुर. आने वाले दिनों में शहरवासी और पर्यटकों के लिए जंतर-मंतर के ज्योतिष गणित को समझना आसान होगा। ढाई सौ साल पुराने यंत्रों की सटीक गणना को समझने और पर्यटकों के फायदे के लिए पुरातत्व विभाग यहां सुविधाओं में इजाफा कर रहा है।

इसके लिए जल्द ही यहां ऑडियो-गाइड की सुविधा सहित यंत्रों पर हेरिटेज साइनेज बोर्ड लगाए जा रहे हैं। साथ ही पहली बार शोध छात्रों की सुविधा के लिए जंतर-मंतर परिसर में मिनी लाइब्रेरी भी खोली जा रही है।

गौरतलब है कि अधिकारियों के एकजुट प्रयास के बाद विश्व हेरिटेज साइट की सूची में जंतर-मंतर का नाम दर्ज कराने के प्रयास सार्थक होते नजर आ रहे हैं। इसे देखते हुए यहां दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। जीर्णोद्धार कार्यो ने भी रफ्तार पकड़ ली है। अधिकारियों की मानें तो महीने भर में ये कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। इनमें प्रमुख तौर से पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रवेश और निकास द्वारों को चौड़ा किए जाने के अलावा पर्याप्त सुविधालय बनाए जाने हैं।

पावणों के लिए ‘जंतर-मंतर बाय नाइट’ : जंतर-मंतर का आकर्षण बढ़ाने के लिए नवंबर माह से पावणों के लिए स्विट्जरलैंड की एक फर्म यहां जंतर-मंतर बाय नाइट प्रोग्राम शुरू करेगी। इसमें आकर्षक लाइटिंग और म्यूजिक की धुनों के साथ जंतर-मंतर की जानकारी मिलेगी। रात में खुले आकाश तले इस रूहानी म्यूजिक को सुनते हुए जंतर-मंतर को देखना पर्यटकों के लिए एक नया अनुभव होगा।

जयपुर वेधशाला 1734 से अब तक
जयपुर की बसावट के साथ ही तत्कालीन महाराजा सवाई जयसिंह ने जंतर-मंतर का निर्माण कार्य शुरू करवाया, जो ज्योतिष शास्त्र में दिलचस्पी रखते थे और इसके ज्ञाता थे। जंतर-मंतर को बनने में करीब 6 साल लगे और 1734 में यह बनकर तैयार हुआ। जयपुर सहित देशभर में कुल पांच जंतर-मंतर (बनारस, दिल्ली, मथुरा और उज्जैन) मौजूद हैं, जिनमें जयपुर जंतर-मंतर के यंत्र ही सही स्थिति में हैं। यहां सालाना करीब साढ़े पांच लाख पर्यटक आते हैं। इनमें भारतीय पर्यटकों के लिए 20 रुपए और विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट दर 100 रुपए है।

हेरिटेज विद नॉलेज
जयपुर में देश का पहला ऐसा म्यूजियम बनने जा रहा है, जिसमें बच्चों को उन्हीं की जुबां में देश-दुनिया की जानकारी दी जाएगी। टाउन हॉल में बन रहे चार मंजिला म्यूजियम के प्रथम तल पर बच्चों का यह म्यूजियम तैयार होगा।

म्यूजियम का कार्य देख रहे एईएन जितेन्द्र जोशी ने बताया कि म्यूजियम से संबंधित अधिकारियों की हाल ही में हुई बैठक में इसके विभिन्न पहलुओं को अंतिम स्वीकृति दी गई है। इसके बाद इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। देश-विदेश व स्थानीय पर्यटकों को म्यूजियम देखने के लिए लगभग 2 साल का इंतजार करना पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं वाले इस म्यूजियम का डिस्प्ले कार्य कनाडा की लार्डस कल्चरल रिनोवेशन फर्म को सौंपा गया है, जिसने दुनियाभर में सर्वाधिक म्यूजियम स्थापित किए हैं।

बच्चों के म्यूजियम की तैयारियों पर आमेर विकास एवं प्रबंध प्राधिकरण साढ़े 5 करोड़ रुपए खर्च करेगा, जबकि पूरे म्यूजियम पर लगभग 24 करोड़ रुपए का खर्च प्रस्तावित है। म्यूजियम के हेरिटेज भवन में एक पूरे कक्ष को कॉन्फरेंस हॉल का रूप दिया जाएगा, जिसमें 300 से साढ़े तीन सौ लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। इस हॉल को किराए पर दिया जाएगा, जिससे मिलने वाली आय म्यूजियम सुविधाओं पर खर्च की जा सकेगी। इसके साथ ही चार मंजिले म्यूजियम में एक अस्थायी गैलरी होगी, जिसमें कोई भी व्यक्ति विशेष अथवा संस्था अपने संग्रह प्रदर्शित कर सकेगी।

यहां से चली सरकार, अब खेलेंगे बच्चे
आजादी के बाद मानसिंह टाउन हॉल को पूर्व महाराजा ने एक रुपए किराए पर राज्य सरकार को सौंपा था। राज्य सरकार ने इसमें विधानसभा बनाने का निर्णय किया बाद में जनपथ पर नई विधानसभा बन जाने पर इसे वहां शिफ्ट कर दिया गया। हवामहल, जलेबी-चौक, जंतर-मंतर, सिटी पैलेस, गोविन्ददेव मंदिर के नजदीक होने के कारण राज्य सरकार ने पुराने विधानसभा भवन को पर्यटन दृष्टि से म्यूजियम बनाने का निर्णय किया है। जहां लगभग दो साल बाद पर्यटकों और शहरवासियों सहित बच्चे गौरवशाली इतिहास से रूबरू होंगे।





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