जयपुर. जयपुर को छलनी होने से रोका जा सकता था भास्कर के इस खुलासे के बाद गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि सिमी सरगना सफदर नागौरी से पूछताछ की मप्र पुलिस की रिपोर्ट हमारी जांच एजेंसी के पास थी, लेकिन उनका अपना भी एक सवाल यह है कि जब गुजरात के पास भी यह रिपोर्ट पहुंच चुकी थी, तो वे धमाके क्यों नहीं रोक पाए?
बैंस बाद में डीजीपी बने इसलिए रिपोर्ट नहीं पढ़ पाए
>> सफदर नागौरी ने मप्र पुलिस के सामने जो राज उगले थे, क्या वह रिपोर्ट आपके पास थी?
कटारिया- बिल्कुल थी, जांच एजेंसी इस दिशा में काम भी कर रही थी। केंद्र की आईबी समेत कई और जांच एजेंसियां भी काम कर रही थी।
>> रिपोर्ट में कुछ लोगों के नाम भी थे। उनको क्यों नहीं पकड़ा जा सका?
हमारी पुलिस ने संदिग्ध लोगों की धरपकड़ की। उनसे पूछताछ भी चली। इससे ज्यादा क्या करते।
>> जिस रिपोर्ट की बात की जा रही है उसे तो प्रदेश के डीजीपी ने भास्कर के खुलासे के बाद पढ़ी है?
जिस समय यह रिपोर्ट आई थी, उस समय के.एस.बैंस डीजीपी नहीं थे। जब वे डीजीपी बने, तब रिपोर्ट को आए काफी दिन हो गए थे। इस कारण पढ़ नहीं सके होंगे।
>> लेकिन गृहमंत्री और एडीजी (क्राइम) तो पढ़ सकते थे?
हम तो लगातार प्रयास कर रहे थे। एडीजी (क्राइम) ए.के.जैन के बारे में मैं क्या कहूं, उनकी वो जानें।
>> गुर्जर आंदोलन में सरकार की विफलता पर डीजीपी ए.एस.गिल को हटाया गया, अब बम ब्लास्ट कांड में भी आपकी पुलिस पूरी तरह विफल रही है। ऐसे में किसको हटाएंगे?
आप गलत कह रहे हैं। गिल को हटाया नहीं गया। वे छुट्टियों पर हैं। हमने भी तो एक को पकड़ लिया है। हमें सफलता मिली है। पकड़ने में समय तो लगता है।
>> आपको नहीं लगता कि इस रिपोर्ट को अगर ढंग से पढ़ लेते तो 68 लोगों की मौत टाली जा सकती थी?
आप यह भी तो देखें कि यह रिपोर्ट गुजरात और मप्र पुलिस के पास भी थी। फिर मप्र पुलिस ने किसी को क्यों नहीं पकड़ा? गुजरात पुलिस भी तो ब्लास्ट रोक सकती थी।
हमने लापरवाही जानबूझकर थोड़े ही की।
>> इसका मतलब तो ये हुआ कि अगर गुजरात पुलिस लापरवाह है, तो हम भी वैसा ही करेंगे?
मैं आपसे यही तो कह रहा हूं। आप कुछ भी कह सकते हो। हमने एक व्यक्ति को पकड़ा है। उससे पूछताछ की जा रही है। हमें आगे भी सफला मिलेगी। हम हमेशा सतर्क रहे। अब इस सब में समय तो लगता ही है।