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जम्मू में आतंकियों से जूझा इंदौर का बेटा

महू. बुधवार को आतंकवादियों ने एक घर में घुसकर लोगों को बंधक बना लिया तब गोलियां तो जम्मू के बाहरी हिस्से के एक मकान में चल रही थीं लेकिन एक परिवार की सांसें महू में भी ऊपर-नीचे हो रही थीं क्योंकि उनसे मुकाबला करने वाले सेना के जवानों में यहां का जवान ऋषि आर्य भी था।

उसकी पत्नी ने फोन कर सास को बताया तो पूरा परिवार 19 घंटे चली मुठभेड़ खत्म होने तक टीवी देखता रहा। फिर ऑपरेशन खत्म होने के बाद बेटे ने मां गीताबाई आर्य को फोन पर पूरा हाल सुनाया।

ऋषि की मां गीताबाई ने भास्कर को बताया बुधवार सुबह जम्मू से बहू का फोन आया, वह घबराई हुई थी। उसने कहा मां टीवी खोलकर देखिए वे लड़ रहे हैं आतंकवादियों से। टीवी ऑन की तो सामने मुठभेड़ चल रही थी। कई जवान दिखे लेकिन नजरें बेटे को तलाश रही थीं। एक हल्की झलक मिली तो वह छत पर नजर आया। इसके बाद हम तब तक टीवी के सामने से नहीं हटे, जब तक ऑपरेशन खत्म नहीं हो गया। बेटे के साथ बहू और पोते की भी चिंता थी जो जम्मू में ही हैं। सभी के चेहरे सामने घूम रहे थे। घंटों हम बेटे से बात करने के लिए परेशान होते रहे लेकिन जब बहू का फोन आया कि वे घर आ गए हैं, तब सभी ने राहत की सांस ली।

भैया हमें बचा लीजिए..सुन सवार हुआ जुनून
फिर बेटे ने फोन कर कहा- सबसे मुश्किल पल में एक बार आपकी याद आई लेकिन सामने आतंकवादी थे। हमारा पूरा ध्यान बंधक परिवार को बचाने पर था। इससे पहले हम और जेसीओ जिप्सी में थे।

तभी सामने टेम्पो आता दिखाई दिया। उसे रोकने के लिए हाथ दिखाया तो अंदर से गोलियां चलनी शुरू हो गईं। टेम्पो आगे था और जिप्सी पीछे। इसके बाद आतंकवादी शहर के बाहरी हिस्से के मकान में घुस गए। जिप्सी में से ही हमने अपने अफसरों को जानकारी दी तो और जवान पहुंच गए। फिर छत पर एक बूढ़ी महिला नजर आई।

आतंकवादी उसे नुकसान न पहुंचा दें इसलिए हम घर के बाजू वाले हिस्से से छत पर चढ़ गए। खिड़की से एक बालिका ने मुझसे कहा- भैय्या हमें बचा लीजिए। बस, उसकी आवाज सुनकर जुनून सवार हो गया। इसके बाद शुरू हुआ आतंकवादियों से संघर्ष जो लगभग १९ घंटों बाद उनके खात्मे के साथ ही पूरा हुआ। ऑपरेशन में हमने अपने जेसीओ को खो दिया जो बहुत अच्छे इन्सान थे।

आंखें सूज गई थी
गीताबाई आर्य ने बताया टीवी पर सतत निगाहें टिकी हुई थीं। सभी जवान अपने ही पुत्र जैसे लग रहे थे। यह वह समय था जिसमें कुछ भी करने और सुनने को मन नहीं कर रहा था। बस, बार-बार नजरें अपने ऋषि को ढूंढ रही थीं। उसकी एक झलक मन को खुशी से भर देती और काफी देर तक न दिखने पर मन बैचेन हो उठता था। जब पता चला आतंकवादी मारे जा चुके हैं, तब राहत की सांस ली। जब अपना चेहरा देखा तो आंखें सूज चुकी थी। इसके बाद बेटे से फोन पर बात करते समय मेरी आंखों में आंसू थे लेकिन मन में उसकी वीरता से मिली संतुष्टि। बस, इतना ही कह पाई- तुमने हमारा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

पिता ने दी शाबासी
ऋषि के पिता एडवोकेट प्रकाश आर्य ने बताया उन्हें एक सम्मेलन में शामिल होने के लिए मॉरीशस जाना था लेकिन इसके पहले ही यह ऑपरेशन शुरू हो गया। गर्व है कि बेटे ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया और लोगों की जान बचाई। मैंने इस वीरतापूर्ण काम पर उसे शाबासी दी।





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