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बीमारियों की जड़ बना दूषित पानी

ग्वालियर. ग्वालियर-चंबल अंचल के जिले बीमारियों के प्रकोप से जूझ रहे हैं। एक माह में आधा सैकड़ा मौतें इस बात की गवाह हैं। जिला अस्पतालों के ओपीडी में मरीजों की संख्या दुगुनी हो गई है।

बीमारियां फैलने का एक कारण प्रदूषित जल है जिसे अंचल की आधी आबादी पी रही है। यह उनकी मजबूरी है क्योंकि आधे से ज्यादा जिलों में जल शोधन संयंत्र हैं ही नहीं। जहां हैं भी वहां सिर्फ औपचारिकता ही निभाई जा रही है। ग्वालियर : ग्वालियर शहर व डबरा तहसील में पानी शोधन संयंत्र की व्यवस्था है। भितरवार में पानी शोधन के लिए संयंत्र नहीं है। यहां ओवरहैड टैंक व ट्यूबवेल से पानी जनता को सप्लाई किया जा रहा है। ओवरहेड टैंक में क्लोरीन की गोलियां डालकर पानी को शोधन की प्रक्रिया अपनाई जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

शिवपुरी : जिले में शिवपुरी शहर, करैरा व पिछोर तहसीलों में ही पानी शोधन संयंत्र स्थापित हैं। जबकि पोहरी, कोलारस, नरवर, बदरवास व खनियांधाना में संयंत्र की व्यवस्था नहीं है। जहां संयंत्र नहीं लगे हैं वहां ट्यूबवेलों व ओवरहेड टैंकों से जलापूर्ति की जा रही है। ओवरहैड टैंकों में पानी के शोधन के लिए क्लोरीन की गोलियां नियमित रूप से नहीं डाली जाती है।

मुरैना : जिले में मुरैना जिला मुख्यालय समेत किसी भी तहसील में जल शोधन संयंत्र स्थापित नहीं है। ट्यूबवेलों से पानी ओवरहैड टैंकों में पहुंचाया जाता है फिर उसे नलों में सप्लाई किया जाता है। हालांकि नगरीय निकायों का दावा है कि वे वाटर टैंकों में में पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन की गोलियां डलवाते हैं लेकिन ऐसा नहीं होता। साल में कभी -कभी इस प्रक्रिया को अपनाया जाता है।

भिंड : जिले में सिर्फ गोहद तहसील ऐसी है जहां जल शोधन संयंत्र लगा है। इसके अलावा जिला मुख्यालय समेत किसी भी तहसील में संयंत्र की व्यवस्था नहीं है। जिले में ट्यूबवेलों का पानी ओवरहेड टैंकों में स्टोर कर जनता तक पहुंचाया जाता है। यहां भी नगरीय निकायों का कहना है कि वे क्लोरीन की गोलियां डालकर पानी का शोधन कर सप्लाई कर रहे हैं लेकिन अगर जनता की बात मानें तो इसमें सच्चई नहीें है।

दतिया : जिले में केवल जिला मुख्यालय पर ही 40 साल पुराना जल शोधन संयंत्र लगा है। इसके अलावा कहीं भी इस संयंत्र की व्यवस्था नहीं है। जिला मुख्यालय पर जिस समय यह संयंत्र लगाया गया था उस समय और आज के हालातों को देखते हुए यह संयंत्र पूरे शहर को शुद्ध जलापूर्ति करने में सक्षम नहीं है। महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है।

श्योपुर : इस जिले में सिर्फ विजयपुर में ही जल शोधन संयंत्र स्थापित है लेकिन यह भी पिछले छह सालों से बंद पड़ा है। जिला मुख्यालय समेत कराहल व बड़ौदा में संयंत्र नहीं हैं। यहां भी ट्यूबवेलों व ओवरहेड टैंकों से पानी की सप्लाई की जा रही है जिसमें भी क्लोरीन की गोलियों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

जल शोधन की प्रक्रिया : जल शोधन संयंत्र में पानी के शुद्धिकरण की प्रक्रिया लगभग दो घंटे तक चलती है। विभाग के अनुसार पहले पानी को जलाशयों, नदियों या अन्य ोतों से संयंत्र तक लाया जाता है। यहां सबसे पहले इसमें ऐलम(फिटकरी) मिलाने कार्यवाही चलती है। जब यह काम पूरा हो जाता है फिर पानी को शोधन वाले टैंकों में पहुंचा दिया जाता है जहां काफी देर तक पानी को रखा जाता है जिससे सारी गंदगी तली में बैठ जाती है इसके बाद शुद्ध जल दूसरे टैंकों में पहुंचा दिया जाता है और इसमें ब्लीचिंग पाउडर मिलाई जाती है। इसके बाद पानी की सप्लाई का जाती है।

नहीं मिलाई जाती ब्लीचिंग : नजनता का कहना है कि पहले पानी को देखकर अंदाजा लग जाता था कि पानी में ब्लीचिंग पाउडर डाला गया है । पानी को नल से किसी भी बर्तन में भरते समय ऊपर झाग आ जाता था और ब्लीचिंग की तेज स्मैल आती थी। पानी पीने में भी ब्लीचिंग का स्वाद आता था लेकिन अब ऐसा नहीं होता।

दूषित पानी से पेट की बीमारियां : चिकित्सकों की बात पर भरोसा किया जाए तो पेट की 90 प्रतिशत बीमारियां दूषित पानी पीने से होती हैं। प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों की सूची तो लंबी है लेकिन कुछ खास बीमारियां ऐसी है जो व्यक्ति को ज्यादा प्रभावित करती हैं और घातक भी होती हैं। इनमें हैपेटाइटिस(पीलिया), ड्रैकुलासिस (पेट में कीड़े), ट्रैकोमार (संक्रमण) हैजा व पेचिश प्रमुख हैं।

गंदा पानी पीने से खासकर पेट की बीमारियां पैदा होती हैं। पीलिया,पेचिश, आंव व उल्टी-दस्त रोग प्रदूषित पानी पीने से होते हैं। कभी-कभी व्यक्ति जीवन व मौत के बीच संघर्ष करने की स्थिति तक में जा पहुंचता है।
-डा. केके गुप्ता, मेडिसिन विशेषज्ञ

पूर्व चिकित्सक, जिला अस्पताल मुरैना शिवपुरी शहर में फिल्टर प्लांट के जरिए जो पानी सप्लाई किया जाता है उसकी स्वच्छता पर पूरा ध्यान दिया जाता है। शोधन की पूरी प्रक्रिया अपनाई जाने के बाद ही जलापूर्ति की जाती है।
-जगमोहन सिंह सेंगर, अध्यक्ष, नगर पालिका, शिवपुरी

शहर में सप्लाई होने वाले पानी के ओवरहैड टैंकों की सफाई कराई जाती है। उनमें पानी शुद्धिकरण के लिए ब्लीचिंग पाउडर व क्लोरीन की गोलियां भी डाली जाती हैं।
- सुरेश चंद्र जैन, सीएमओ, नगर पालिका भिंड





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