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कंप्यूटर से होंगे नए धमाके

जयपुर. जयपुर सीरियल बम ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार लखनऊ निवासी शाहबाज हुसैन के कंप्यूटर तथा हार्ड डिस्क को राजस्थान की एसओजी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

इस सिलसिले में यहां से एक पुलिस दल लखनऊ गया हुआ था। जब्त की गई हार्ड डिस्क की एफएसएल से जांच करवाई जाएगी। संभवत इससे जयपुर ब्लास्ट का राज खुल सकता है। पुलिस टीम ने शाहबाज के घर की तलाशी ली तो वहां सूरत में रखे गए बमों में मिली चिप के जैसी फोटो कॉपी मिली है।

एसओजी डीआईजी ए.पौन्नूचामी ने बताया कि तलाशी में चिप, कुछ सीडी तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। हार्ड डिस्क लेने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संग्राम सिंह को लखनऊ भेजा गया है।

राजस्थान में दो बार आया शाहबाज: पौन्नूचामी ने बताया कि शाहबाज ने पूछताछ में दो बार राजस्थान आने की बात कबूल की है। वह जयपुर कब-कब आया अभी इस बारे में जांच की जा रही है।

शाहबाज लखनऊ में साइबर कैफे के अलावा कंसलटेंसी सेंटर भी चलाता है तथा विदेश में लोगों को नौकरी दिलाने का काम भी करता है। पूछताछ में शाहबाज ने बताया कि उसने दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू विवि से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की। काशी विश्वविद्यालय से पढ़ाई की।

मुस्लिम समुदाय के एक अखबार में मध्यप्रदेश पुलिस के हत्थे चढ़े सफदर नागौरी संपादक था तो शाहबाज सहायक संपादक था। इसके अलावा वह फ्रीलांस रिपोर्टिग भी करता था और न्यूज एजेंसी के लिए भी लिखता था।

मीडिया सेल का भी चीफ था शाहबाज: पूछताछ में उसने बताया कि सफदर नागौरी ने उसे लीगल तथा मीडिया सेल का चीफ बनाया था।

अजमेर ब्लास्ट से नागौरी और शाहबाज का कोई संबंध नहीं: पौन्नूचामी ने बताया कि गत वर्ष अजमेर में दरगाह में हुए बम ब्लास्ट का सफदर नागौरी और शाहबाज से कोई संबंध नहीं है।

अहमदाबाद में पूछताछ में आया था शाहबाज का नाम: साजिद मंसूरी से अहमदाबाद में वहां की तथा राजस्थान पुलिस की पूछताछ में शाहबाज का नाम आया था। इस पर ही उसको पकड़ने के लिए मजिस्ट्रेट से गिरफ्तारी वारंट लेकर पुलिस टीम उत्तर प्रदेश भेजी गई थी।

सिमी का अध्यक्ष बनाया गया था शाहबाज को: शाहबाज ने पूछताछ में इस बात को कबूल किया है कि उसे सिमी का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके अलावा चार लोगों की एक कमेटी भी बनाई गई थी। जिसमें आमिल परवेज, अदनान तथा सिबली को भी शामिल किया गया था। ये मार्च माह में इंदौर पुलिस के हत्थे चढ़ गए थे।

शाहबाज नहीं गया था बैठक में: जिस बैठक में मध्य प्रदेश पुलिस ने सफदर नागौरी तथा सिमी के बारह सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया था उसमें शाहबाज शामिल नहीं हुआ था। नागौरी ने पूछताछ में शाहबाज का नाम लिया था लेकिन किसी ने भी उससे पूछताछ नहीं की।

जयपुर लाए जाऐंगे साजिद व अबू बशर को: पौन्नूचामी ने बताया कि अहमदाबाद तथा सूरत पुलिस की पूछताछ के बाद आरोपी साजिद मंसूरी तथा अबू बशर को जयपुर लाया जाएगा। जहां जयपुर ब्लास्ट के बारे में पूछताछ की जाएगी।

जरूरत पड़ी तो नार्को टेस्ट कराया जाएगा शाहबाज का: शाहबाज हुसैन से जयपुर ब्लास्ट के बारे में पूछताछ कर रही विशेष अनुसंधान टीम (एसआइटी) जरूरत पड़ने पर उसका नाकरे टेस्ट भी करा सकती है। डीआईजी ए. पौन्नूचामी के अनुसार अभी तक नार्को टेस्ट की जरुरत महसूस नहीं हुई है।

यूपी पुलिस जयपुर पहुंची: शाहबाज से पूछताछ के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भी जयपुर पहुंच गई है। अब जयपुर पुलिस के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पुलिस भी उससे पूछताछ करेगी। शाहबाज पर वाराणसी, फैजाबाद में भी बम ब्लास्ट करने का शक है।

ये सवाल जिनके आप चाहते हैं जवाब

सफदर नागौरी से पूछताछ के वक्त क्या हमारी पुलिस मप्र गई थी?
हां, नागौरी से 28 मार्च से लेकर 11 अप्रैल तक मप्र व हमारी पुलिस ने संयुक्त इंट्रोगेशन किया था।

क्या, नागौरी व उसके साथियों ने जयपुर व अहमदाबाद धमाकों के बारे में बता दिया था?
हां, नागौरी ने खुलासा किया था कि सिमी से जुड़े शाहबाज, साजिद मंसूरी व उसके साथी सभी राज्यों में फैल चुके हैं। वे बड़ी आतंकी कार्रवाई कर सकते हैं। राज्यों के नाम भी बताए थे।

तो क्या किया हमारी पुलिस ने?
पूछताछ के बाद पुलिस मप्र से जयपुर वापस आ गई। पूछताछ रिपोर्ट बनाकर उच्चधिकारियों को सौंप दी।

नागौरी ने जो नाम बताए उनका क्या?
जांच एजेंसी पूछताछ के नाम पर कई लोगों को पकड़ती रही। उस रिपोर्ट के बारे में कुछ नहीं किया जो मप्र व जयपुर पुलिस ने बनाई थी।

फिर कहां गई वो रिपोर्ट?
अधिकारियों ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में रख दिया ताकि लगे कि वे भी मप्र जाकर जांच करके आए थे।

तो फिर कैसे पता चला रिपोर्ट का?
हमारी पुलिस रिपोर्ट को भूल चुकी थी। सवा तीन माह बाद तो पुलिस अधिकारियों को पता ही नहीं था कि ऐसी कोई रिपोर्ट भी है। किसी तरह यह रिपोर्ट मप्र से मीडिया में आई। मीडिया में खुलासे के बाद पुलिस की आंखें खुलीं।

पुलिस व सरकार अब क्या कह रही हैं?
डीजीपी ने गुरुवार शाम को आखिर रिपोर्ट देखने की पुष्टि की। शुक्रवार को गृहमंत्री कटारिया ने भी कहा रिपोर्ट थी। हालांकि दोनों ही रिपोर्ट क्यों नहीं पढ़ी इसका गोलमाल जवाब देते रहे।





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