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हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा..

बिलासपुर. जेल में ऐसे आरोपी बंद हैं, जो जमानतदार या आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलने के कारण जमानत होने के बावजूद लंबी अवधि से चहारदीवारी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इनमें अधिकांश संगीन अपराधों में न्यायालय से जमानत पाने वाले बंदी शामिल हैं।

मामूली अपराध करने वालों के लिए तो कानून में स्वयं की जमानत यानी मुचलका लेने का प्रावधान है, लेकिन जिन्होंने संगीन अपराध किए हैं, वे खुद की मदद भी नहीं कर पा रहे हैं। अदालत ने उन्हें जमानत के लिए पात्र भी मान लिया है, पर कोई अपना गुनाह के बाद उनका साथ नहीं देना चाहता।

सेंट्रल जेल में ऐसे 24 कैदी बंद हैं, जिन्हें कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। जमानतदार या दस्तावेज नहीं होने के कारण वे आजादी की सांस नहीं ले पा रहे हैं। इनमें 4 महिला बंदी भी शामिल हैं। कानून के जानकारों ने जमानत का प्रावधान तो बनाया है,लेकिन ऐसा कानून नहीं बनाया, जिससे जमानतदार न पाने वालों को चहारदीवारी से मुक्ति मिल सके। गरीब और शोषित लोगों की सेवा करने का दावा करने वाले भी इनकी मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाते। संगीन जुर्म के अपराधी होने के कारण कोई भी इनकी मदद नहीं करना चाहता है।

क्या है प्रावधान: वरिष्ठ अधिवक्ता विनय दुबे के मुताबिक ऐसे बंदी जो जमानतदार या आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के कारण जेल में बंद हैं, वे संबंधित न्यायालय में जमानत की शर्तो पर रियायत देने के लिए आवेदन कर सकता है। अदालत बंदी की उम्र, स्वास्थ्य, अपराध की गंभीरता, जेल में निरुद्ध रहने की अवधि या परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेती है। समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट या विभिन्न आयोग भी निर्देश देते हैं, जिसके आधार पर जमानत दी जाती है।

12 आरोपी हत्या के
बंदियों में हत्या, डकैती, बलात्कार, लूट, नारकोटिक्स, भ्रूण हत्या व चोरी जैसे अपराधों के आरोपी शामिल हैं। सबसे ज्यादा संख्या हत्या के आरोपियों की है। ऐसे 12 आरोपी हैं, वहीं बलात्कार के 3 व डकैती के 2 आरोपी बंद हैं।

परिस्थितियों के आधार पर मुजरिमों को जमानत दी जाती है। संगीन अपराध में शामिल बंदियों को अदालत के आदेश के मुताबिक जमानतदार पेश करने पड़ते हैं। इसमें आयोग दखल नहीं दे सकती।
—दिलीप भट्ट

सचिव मानवाधिकार आयोग
अधिकांश बंदी दूसरे जिलों के हैं। संबंधित गांव के सरपंचों से संपर्क करने के लिए स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखा गया है। ऐसे ही प्रयासों से कुछ को छुड़वाया गया है, जो बच गए हैं, उनके लिए भी कोशिश की जाएगी।
—सुबोध कुमार सिंह, कलेक्टर

जेल में ऐसे कुछ बंदी हैं, जिनकी जमानत हो चुकी है, वे अपना जमानतदार प्रस्तुत नहीं करने में असमर्थ हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद ली जा रही है व विधिक सहायता समितियों के माध्यम से भी निवेदन किया जाएगा।
—एसके मिश्रा, जेल अधीक्षक





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