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आरोप लगाने पर प्रतिपक्ष के नेता निष्कासित

उदयपुर. नगर परिषद बोर्ड की शनिवार को हुई बैठक में जोरदार हंगामा हुआ। इसी हंगामें में सभी प्रस्तावों का अनुमोदन कर दिया गया। भवन निर्माण अनुमति समिति के अध्यक्ष को सबसे भ्रष्ट बताने पर प्रतिपक्ष के नेता के. के. शर्मा को निष्कासित कर दिया गया। विरोध में सभी कांग्रेसी पार्षद धरने पर बैठ गए। चार साल में पहली बार बोर्ड की बैठक में सांसद किरण माहेश्वरी का आना चर्चा का विषय रहा।

पिछली बैठक के निर्णयों की पुष्टि के बाद नए निर्माण कार्र्यो और संशोधित निर्माण कार्यों की स्वीकृतियों पर विचार किया गया। इसके साथ ही प्रतिपक्ष ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सत्तापक्ष को घेरना शुरू किया। उनका आरोप था कि जिन आठ मामलों में अवैध निर्माण तोड़ने का निर्णय किया गया था, उनमें से सात का नियमन करने का मामला उठाया था।

इस पर भाजपा पार्षदों ने भी हंगामा शुरू किया और प्रतिपक्ष पर भी आरोप लगाए। करीब पौन घंटे तक हुए इस हंगामा के बीच बैठक में प्रस्तावित मामलों का अनुमोदन कर दिया गया। मामला शांत नहीं होने पर सभापति रवींद्र श्रीमाली को राष्ट्रगान कराकर बैठक समापन की घोषणा करनी पड़ी। भाजपा पार्षदों ने पत्र देकर प्रतिपक्ष के नेता की सदस्यता रद्द करने, मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।

आमने-सामने

सामर सबसे भ्रष्ट
बैठक में प्रतिपक्ष के नेता केके शर्मा ने अवैध निर्माण की रिपोर्ट का मामला उठाते हुए भवन निर्माण अनुमति समिति के अध्यक्ष प्रमोद सामर पर सबसे भ्रष्ट होने का आरोप लगाया। उन्होंने सभापति को भी संदेह के घेरे में लिया। सभापति ने प्रतिपक्ष के नेता को निष्कासन की चेतावनी देते हुए सामर से माफी मांगने की कही। प्रतिपक्ष के नेता ने जवाब में कहा कि ‘मैं गर्दन कटवा लूंगा मगर ऐसे भ्रष्ट व्यक्ति से माफी नहीं मांगूगा’। बाद में प्रतिपक्ष के नेता को बैठक से निष्कासित करने का निर्णय किया गया।

अवैध निर्माण के मामले में गठित कमेटी ने आज ही जांच रिपोर्ट की प्रगति से अवगत कराया था। दबाव बनाने के लिए ही हंगामा किया है।
—प्रमोद सामर, अध्यक्ष भवन निर्माण अनुमति समिति

शर्मा भी दूध के धुले नहीं
सभापति व भवन निर्माण अनुमति समिति के अध्यक्ष पर आरोप लगने से भाजपा पार्षद आक्रोशित हो गए। उन्होंने प्रतिपक्ष नेता को चोर करार दे दिया। तब कांग्रेसी पार्षद नारेबाजी करने लगे।

चंदा सुहालका ने आरोप लगाया कि भाजपा की महिला पाषर्द व एक सहवृत पार्षद बीपीएल सूची में हैं। इसी बीच सभापति ने वाटिका उपनियमों में संशोधन, मृत मवेशी के लिए की गई निविदा में प्राप्त राशि के अनुमोदन और स्व. सुंदरसिंह भंडारी की मूर्ति लगाने पर व्यय को हरी झंडी दे दी।

मेरी बात तथ्यों पर आधारित है। अवैध निर्माण तोड़ने के निर्णय के बाद नियमन कर फिर जांच का नाटक क्यों? सामर दो साल से सदन को गुमराह कर रहे हैं।
—के. के. शर्मा, नेता प्रतिपक्ष





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