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अस्पताल पर खर्च होंगे सवा पांच करोड़

उदयपुर. राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसायटी स्थानीय शाखा (आरएमआरएस) की शनिवार को हुई बैठक में सवा पांच करोड़ का बजट पारित किया गया। इसमें से 93 लाख रुपए के नए उपकरण खरीदे जाएंगे और शेष राशि रख-रखाव पर खर्च होगी।

प्रिंसीपल कार्यालय के सेमीनार हॉल में सांसद किरण माहेश्वरी की मौजूदगी में करीब डेढ़ घंटे चली बैठक में अस्पताल में नए उपकरण खरीदने और ऑपरेशन थिएटर की आवश्यकताओं पर चर्चा हुई।

अस्पताल की कार्यवाहक अधीक्षक प्रमिला बजाज ने भी कुछ उपकरणों की ओर ध्यान दिलाया। डा. एच. एल. खमेसरा ने ऑपरेशन टेबल और लाइटों की जरुरतों पर जोर दिया। बैठक में यूआईटी अध्यक्ष शिवकिशोर सनाढ्य, प्रिंसीपल डॉ. एसके कौशिक, ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. चमनसिंह देवड़ा, कलेक्टर कुलदीप रांका, एवीएनएल के एक्सईएन, हिंदुस्तान जिंक, आरएसएमएम के अधिकारी सहित सोसायटी सदस्य मौजूद थे।

अस्पताल में आएंगे नए उपकरण
बजट में से 93 लाख रुपए में नए उपकरण और मशीनें खरीदने का निर्णय लिया गया। इसमें लेप्रोस्कोपी मशीन, ऑपरेशन टेबल, ऑपरेशन लाइट्स, केंसर के उपचार के लिए टीएनएस मशीन सहित दर्जनों उपकरण खरीदे जाएंगे।

कैफेटेरिया को हरी झंडी
अस्पताल परिसर में कैफेटेरिया की स्वीकृति दे दी गई। बीओटी आधार पर संचालित कैफेटेरिया के लिए शीघ्र ही निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी।

अस्पताल परिसर में होगी सफाई
अस्पताल परिसर में नालों की सफाई करवाकर पुन: निर्माण नगर परिषद करवाएगी। इसके अलावा अस्पताल के शौचालयों की सफाई के लिए सुलभ कांप्लेक्स संचालकों से प्रस्ताव लेने का भी निर्णय लिया गया।

ओटी कॉम्पलेक्स व पार्किग के प्रस्ताव
अस्पताल परिसर में अंडर ग्राउंड पार्किग और ओटी कांप्लेक्स के प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे गए हैं। यूआईटी के अंशदान से प्रस्तावित दोनों ही योजनाओं पर चर्चा हुई। यूआईटी अध्यक्ष ने साढ़े तीन करोड़ की लागत से प्रस्तावित अंडर ग्राउंड पार्किग और छह करोड़ की लागत वाले ओटी कांप्लेक्स में बजट की स्वीकृति होने की जानकारी दी। स्वीकृति आने के साथ दोनों कार्य के टेंडर निकाले जाएंगे।

हॉस्टल पर खर्च होंगे पचास लाख : मेडिकल हॉस्टलों की मरम्मत पर पचास लाख रुपए खर्च होंगे।

अनुपस्थित रहे सदस्य
बैठक में शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया, ग्रामीण विधायक वंदना मीणा, नगर परिषद सभापति रवींद्र श्रीमाली, आयुक्त महावीर खराड़ी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी के नहीं आने से मामलों पर स्वीकृति हुई, लेकिन अनुशंसा नहीं मिल पाई।





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