कोटा. छठें वेतन आयोग लागू करने के साथ ही मुद्रा स्फीति या महंगाई और बढ़ेगी। वहीं दूसरी ओर व्यापार, उद्योग एवं बाजार में धन की कुछ समय तक तरलता बढ़ने से मांग और आपूर्ति का संतुलन गड़बड़ाएगा। इसे रोकने के लिए ठोस मौद्रिक उपाय जरूरी है। यह मानना है शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, अधिकारियों और अथशास्त्रियों का।
आय बढ़ेगी तो असेसी भी बढ़ेंगे
वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट एसडी जाजू का मानना है कि छठा वेतन लागू होने से कर्मचारियों एवं अधिकारियों के वेतन में 20 से 21 प्रतिशत की ग्रोथ होगी। इससे निवेश बढ़ेगा तथा क्रय क्षमता बढ़ जाएगी। साथ ही रिटर्न भरने वालों की तादाद में भी इजाफा होगा। आयकर की छूट सीमा 1.50 लाख रुपए कर देने से ऐसी योजनाओं में निवेश करेंगे जिससे कर में छूट का अधिक से अधिक लाभ ले सकें। इससे मुद्रा स्फीति पर सीधे असर नहीं पड़ेगा।
विकास दर प्रभावित होगी
अर्थशास्त्री एमके गडोलिया बताते हैं कि जब भी मुद्रा स्फीति बढ़ती है देश की विकास दर पर विपरीत असर पड़ता है। छठा वेतन आयोग लागू होने से कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा। इसे वे बाजार में भौतिक आवश्यकता की वस्तुओं पर खर्च करेंगे। इससे बाजार में कंज्यूमर उत्पादों की मांग बढ़ेगी। इंडस्ट्रियल ग्रोथ होगी, लेकिन विकास दर में कमी आएगी।
मुद्रा की तरलता बढ़ेगी
एसबीबीजे के अंचल कार्यालय में उप महाप्रबंधक राजेन्द्र एस. भार्गव का कहना है कि छठे वेतन आयोग से केन्द्र सरकार पर 15 हजार करोड़ का भार पड़ेगा। यह राशि जैसे ही कर्मचारियों एवं अधिकारियों के पास पहुंचेगी। बाजार में मुद्रा की तरलता बढ़ेगी। परन्तु जितनी तेजी से बढ़ेगी, उतनी ही तेजी से कम होगी। रिजर्व बैंक के कठोर मौद्रिक उपायों से बढ़े हुए वेतन का असर महंगाई पर ज्यादा नहीं पड़ेगा।
दायित्व का निर्वाह ठीक से कर सकेंगे
वाणिज्यिक कर उपायुक्त जमील अहमद कुरेशी का मानना है कि महंगाई जिस स्तर पर है, उसके मुकाबले में यदि छठे वेतन आयोग से कर्मचारियों के वेतन में 20 से 21 प्रतिशत की ग्रोथ होगी। इससे कर्मचारियों का जीवन स्तर सुधरेगा तथा पारिवारिक दायित्व का निर्वाह ठीक से कर सकेंगे। बढ़ा हुआ वेतन बाजार में ही खर्च होगा तो इससे व्यापार एवं उद्योग में ग्रोथ होगी। मांग व आपूर्ति संतुलित रही तो मुद्रास्फीति भी नियंत्रित रहेगी।
निजी क्षेत्र के उद्योग प्रभावित होंगे
उद्यमी एवं निर्यातक महेन्द्र चौधरी का कहना है कि छठे वेतन आयोग के लागू होने से जीवन स्तर का कोई संबंध नहीं है। जीवन स्तर तो मनुष्य की सोच से बदलता है। कर्मचारियों को मिलने वाली बढ़ी हुई राशि का असर तो निश्चित तौर पर व्यापार एवं उद्योग पर पड़ता है। मांग व आपूर्ति गड़बड़ाने से ही महंगाई बढ़ती है। इसका दूसरा असर निजी क्षेत्र पर भी पड़ता है। कर्मचारी उनकी देखादेखी यहां भी वेतन बढ़ाने की मांग करेंगे।