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जमींदोज कर देगा जमीं का पानी

जोधपुर. water शहर में भूजल स्तर बढ़ने की रफ्तार बेकाबू हो चुकी हैं। निरंतर विकराल होती इस समस्या से निजात दिलाने को कोई फिक्रमंद नहीं है।

नतीजा यह है कि नित रोज नए-नए इलाकों में बने मकानों के तहखाने पानी-पानी हो रहे हैं। अब भी चुप्पी नहीं टूटी तो मकानों की चूलें तो हिलेंगी ही, विशेषज्ञ इससे भी बदतर अंजाम से इंकार नहीं करते। भास्कर की खास रिपोर्ट..

शहर में पिछले एक दशक से तेजी से बढ़ते शहर के भूजल स्तर की समस्या अब खतरे के निशान तक पहुंच चुकी है। आलम यह है कि शहर के भीतरी इलाकों से शुरू हुई समस्या अब आखिरी छोर पर बसे इलाकों तक पसर गई है। परंपरागत जलस्रोत और तमाम इमारतों के तहखाने बढ़ते भूजल स्तर की वजह से लबालब होने लगे हैं। भू-वैज्ञानिक जलस्तर बढ़ने की रफ्तार से चिंतित हैं जबकि प्रशासन बेखबर। यही नहीं प्रभावित इलाकों से पानी पंपिंग करने की भू-जल विभाग की करीब साढ़े दस करोड़ की योजना पर भी सरकार ने अमल नहीं किया।

शहरी के भीतरी इलाकों, लक्ष्मीनगर व पावटा क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर बढ़ने से तहखानों में पानी भरने की समस्या अब रातानाडा, रेलवे स्टेशन एवं सरदारपुरा से होती हुई झालामंड चौराहे तक जा पहुंची है। सबसे विकराल हालात अभी जालोरीगेट के भीतर, पावटा, रातानाडा, हाईकोर्ट कालोनी व रेलवे स्टेशन के आस-पास के क्षेत्रों का हैं। बाईजी का तालाब व गंगलाव तालाब बिना बरसात ही लबालब हो गए है।

फतेहसागर व गुलाबसागर से पंप के माध्यम से पानी की निकासी की जा रही है। जबकि गोरिंदा बावड़ी से पंप से पानी निकासी रोक दी गई है। भूमिगत जल स्तर मात्र पांच से छह मीटर गहराई पर होने की वजह से सहकार भवन और उस क्षेत्र की धर्मशालाओं व होटलों के तहखानों में पानी भर गया है। इंडियन एयरलाइंस कार्यालय में स्थाई समस्या बनने से तहखाना ही भरवा दिया गया। हाल ही में पीजोमापी से भूमिगत जलस्तर का आकलन करने पर झालामंड चौराहे के आस-पास इलाके में पानी 6 से 7 मीटर की गहराई पर पाया गया।

मंथर चाल: शहर का भूजल कम करने के लिए प्रारंभिक तौर पर एक सवा दो करोड़ रुपए का प्रोजक्ट बनाया गया था। इसके पीछे खास मकसद ये था कि सूरसागर तालाब व खरबूजा बावड़ी का पानी कम किया जाए। क्यों कि इनका जल स्तर बढ़ने से रावटी रोड, नैनची का बाग, चांदपोल, विद्याशाला, क्रिया का झालरा, नायों का बड़, आडा बाजार सहित शहर के भीतरी क्षेत्रों में जल स्तर इतना बढ़ गया कि घरों की नींवों में पानी आने लगा।

ये योजना कारगर साबित होती तो जल स्तर कम करने के लिए रामबाण साबित होती, लेकिन नगर विकास न्यास की योजना द्रोपदी का चीर बन गई है। इस योजना के तहत न्यास को 10 लाख लीटर क्षमता का टैंक व पाइप लाइन बिछा कर यहां का पानी मंडोर के समीप छोड़ना था। अब पानी का टेंक तो बन कर तैयार है। पाइप लाइन का काम भी आधा हो गया पर योजना लटक गई हैं। ऐसे में अब खरबूजा बावड़ी ओवरफ्लो होने के कगार पर है तो निगम के पंप बंद होने से सूरसागर तालाब भी लबालब होने लगा है।

क्यों बढ़ी समस्या
शहर के भूमिगत जलस्तर बढ़ने के पीछे भू-वैज्ञानिकों ने कायलाना झील की निचली परत में रिसाव होने, परंपरागत जलस्रोत के पानी का उपयोग नहीं होने से कटोरीनुमा जोधपुर की जमीन की निचली परत होने की वजह से पानी की निकासी नहीं होना मुख्य कारण माना गया है। भू-वैज्ञानिकों में समस्या के कारणों को लेकर मतभेद है, लेकिनसमस्या के समाधान के लिए सुझाए गए उपाय में समानता है। प्रशासन ने अभी तक किसी समाधान पर कोई अमल नहीं किया।

क्या है समाधान
वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक प्रोफेसर बीएस पालीवाल का मानना है प्रशासन के गंभीरता से नहीं लेने पर भूमिगत जलस्तर बढ़ने की समस्या ने तेज रफ्तार से खतरनाक रूप धारण कर लिया है। इस वजह से मकानों की नींव कमजोर पड़ने लगी है। प्रभावित इलाकों से पानी की निकासी की तत्काल व्यवस्था नहीं की तो हालात और विकराल हो जाएंगे।

वहीं भूजल विभाग के रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता हीरो धनकानी के अनुसार शहर में सिंवाची गेट के पास व उम्मेद अस्पताल, जालेरी गेट व बाईजी का तालाब व महात्मा गांधी अस्पताल के पास, रेलवे स्टेशन व आन्नद सिनेमा के पास, चारभुजा सिनेमा हाथीराम का ओडा, कलेक्ट्रेट, पावटा, नागौरी गेट, मेड़ती गेट, महामंदिर व मंडोर रोड आदि पर करीब 40-50 नलकूप खोदे जाने चाहिए। इससे एक साल के भीतर भूजल के स्तर में गिरावट आ सकती है।

धनकानी ने नलकूप से विशेष तकनीक से 80 से 90 मीटर गहराई में खोदने और रोटरी ड्रिलिंग, परक्यूशन ड्रिलिंग व डीटी एच कोर्डिनेशन रिंग से खोदने की आवश्यकता जताई है, ताकि तेजी से पानी की निकासी हो सके। उन्होंने बताया कि नलकूप खुदवा कर प्राइवेट पार्टी को लीज पर दिए जाने चाहिए, ताकि वे अपनी पंप से पानी निकाल सरकारी विभागों व प्राइवेट टैंकर्स को बेच सकें। नलकूप के पानी का उपयोग अस्पतालों, स्कूलों, रेस्टोरेंटों, कार्यालयों व बस स्टेंड पर किया जा सकता है।

प्रशासन गंभीर नहीं
पीएचईडी ने इस समस्या के लिए दीर्घावधि योजना के तहत परंपरागत जलस्रोतों व तहखानों में जमा होने वाले पानी का अन्यत्र उपयोग करने के लिए पंप से पानी निकालने का उपाय सुझाया था। इसके लिए भूजल विभाग ने बाकायदा स्थाई पंप करने और पानी की निकासी की 10 करोड़ 63 लाख रुपए की योजना बनाकर कलेक्टर ने सरकार को भेजी थी, ताकि पंप किए गए पानी का अन्यत्र उपयोग किया जा सके। इस योजना पर सरकार ने अभी तक अमल तक नहीं किया है।





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