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भगवान गणेश का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक

भगवान गणेश का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक माना गया है। उनका मस्तक हाथी का है और वाहन मूषक है। उनकी दो पत्नियां ऋद्धि और सिद्धि हैं। सभी गणों के स्वामी होने के कारण इनका नाम गणोश है। परंपरा में हर कार्य के प्रारंभ में इनका स्मरण आवश्यक है। उन्हें विघ्नहर्ता कहते हैं। गणेश में ऐसी क्या विशेषताएं हैं कि उनकी पूजा 33 कोटि देवी-देवताओं में सर्वप्रथम होती है। आइए जानें गणेश की विशिष्टता के बारे में-

ऋग्वेद में लिखा है ‘न ऋते त्वम क्रियते किं चनारे’ अर्थात हे गणेश, तुम्हारे बिना कोई भी कार्य प्रारंभ नहीं किया जाता है। तुम्हें वैदिक देवता की उपाधि दी गयी है। ú के उच्चारण से वेद पाठ प्रारंभ होता है। ú में गणोश की मूर्ति सदा स्थित रहती है। गणेश आदिदेव है। वैदिक ऋचाओं में उनका अस्तित्व हमेशा रहा है। गणेश पुराण में ब्रहा, विष्णु एवं शिव के द्वारा उनकी पूजा किए जाने का तक उल्लेख मिलता है।

वाहन चूहा क्यों -

भगवान गणेश की शारीरिक बनावट के मुकाबले उनका वाहन चूहा काफी छोटा है। चूहे का काम किसी चीज को कुतर डालना है। वह चीर-फाड़ कर उसके प्रत्येक अंग-प्रत्यंग का विश्लेषण करता है। गणेश बुद्धि और विद्या के अधिष्ठाता हैं। तर्क-वितर्क में वे बेजोड़ हैं। इसी प्रकार मूषक भी तर्क-वितर्क में पीछे नहीं हैं। काट छांट में उसका कोई सानी नहीं है। मूषक के इन्हीं गुणों को देखकर उन्होंने इसे वाहन चुना है।

गणोशजी की सूंड -

गजानन की सूंड हमेशा हिलती डुलती रहती है जो उनके सचेत होने का संकेत है। इसके संचालन से दु:ख-दारिद्रय समाप्त हो जाते हैं। अनिष्टकारी शक्तियां डरकर भाग जाती हैं। यह सूंड जहां बड़े-बड़े दिग्पालों को भयभीत करती है, वहीं देवताओं का मनोरजंन भी करती है। इस सूंड से गणोश, ब्रहाजी पर पानी एवं फूल बरसाते है। सूंड के दायीं और बायीं ओर होने का अपना महत्व है। मान्यता है कि सुख-समृद्वि हेतु उनकी दायीं ओर मुड़ी सूंड की पूजा करनी चाहिए, वहीं शत्रु को परास्त करने या ऐश्वर्य पाने के लिए बायीं ओर मुड़ी सूंड की पूजा करनी चाहिए।

बड़ा उदर -

गणेश जी का पेट बहुत बड़ा है। इसी कारण उन्हें लंबोदर भी कहा जाता है। लंबोदर होने का कारण यह है कि वे हर अच्छी और बुरी बात को पचा जाते हैं और किसी भी बात का निर्णय सूझबूझ के साथ लेते हैं। वे संपूर्ण वेदों के ज्ञाता है। संगीत और नृत्य आदि विभिन्न कलाओं के भी जानकार हैं। ऐसा माना जाता है कि उनका पेट विभिन्न विद्याओं का कोष है।

लंबे कान -

श्री गणेश लंबे कान वाले हैं। इसलिए उन्हें गजकर्ण भी कहा जाता है। लंबे कान वाले भाग्यशाली होते हैं। लंबे कानों का एक रहस्य यह भी है कि वह सबकी सुनते हैं और अपनी बुद्धि और विवेक से ही किसी कार्य का क्रियान्वयन करते हैं। बड़े कान हमेशा चौकन्ना रहने के भी संकेत देते हैं।

मोदक बेहद पसंद -

बड़े पेट वालों को मीठा बेहद पसंद होता है। भगवान गणेश एक ही दांत होने के कारण चबाने वाली चीजें नहीं खा पाते होंगे और लडडू खाने में उन्हें आसानी होती होगी। इसीलिए मोदक उन्हें प्रिय है क्योंकि वह आनंद का भी प्रतीक है। वह ब्रrाशक्ति का प्रतीक है क्योंकि मोदक बन जाने के बाद उसके भीतर क्या है, दिखाई नही देता। मोदक की गोल आकृति गोल और महाशून्य का प्रतीक है। शून्य से ही सब उत्पन्न होता है और शून्य में सब विलीन हो जाता है।

गणेश जी का दांत -

भगवान परशुराम से युद्ध में उनका एक दांत टूट गया था। उन्होंने अपने टूटे दांत की लेखनी बना कर महाभारत का ग्रंथ लिखा।

पाश -

उनके हाथ में पाश है। यह राग, मोह और तमोगुण का प्रतीक है। इसी पाश से वे पाप समूहों और संपूर्ण प्रारब्ध को आकर्षित कर अंकुश से इनका नाश कर देते हैं।

परशु -

इसे गणेश हाथ में धारण करते हैं। यह तेज धार का होता है और तर्कशास्त्र का प्रतीेक है। वरमुद्रा - गणपति प्राय: वरमुद्रा में ही दिखाई देते हैं। यह सत्वगुण का प्रतीक है। इसी से वे भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं।

इस प्रकार गणेश जी का सारा व्यक्तिव निराला है। उनके आंतरिक गुण भी उतने ही अनूठे हैं जितना उनका बाहरी व्यक्तित्व। गणेशजी के सभी प्रतीक सिखाते हैं कि हम अपनी बुद्धि को जाग्रत रखें, अच्छी-बुरी बातों को पचाएं, पापों के शमन के लिए सद्तर्को की धार रखें तथा तमोगुण पर विजय हासिल कर सत्वगुणों का विस्तार करें।





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आपके विचार
hari singh solanki kathax
Sunday, 31st Aug 2008, 20:01
meri manyatha alag banathi he shiri ganesh ji maharaj ko is liya puja gaya he ki unaka bedol sarir berup chahara yadi koi kudarth ka mara is tharaha ke chahara wala yakthi peda hojai tho use bhi yasa hi pyar saneh v is parakar pujniy mana javeour use gharana ki dharshti se na dekha jaye
prince Sharma
Monday, 1st Sep 2008, 12:32
The best wrote you about over the God of Ganesh. We got more information of the God of Ganesh. Thanking you, with best regrds prince ID<prince1999@ymail.com>
sushma
Thursday, 4th Sep 2008, 21:06
article on Ganesh ji is good,we should apply it in our life.
HEMENDRA CHOUHAN
Thursday, 11th Sep 2008, 23:56
LORD GANESHA HAS VERY STRONG PARSNALITI AND BEHAVIAR. AS PER FALLOVING OF ONE SENTENCE OF "MATA PARVATI" HE WAS FITE WITH LORD SHIVA THAT THNK AND FALLOWING OF RUL AND REGULATION MAKD HIM 'PRATHM PUJAY" we should apply "GANESH CHARITR" in our life. THANKES FOR NISE ARTICAL TO BHASKAR HEMENDRA