मुंबई. कंपनियां अपनी आमदनी पर दबाव देखते हुए मैनेजमेंट का कैंपस करते समय सावधानी बरत रही हैं। इस साल जब वे नए प्रबंधकों को कास्ट टू कंपनी के पैकेज सौंपेंगी, तब उसमें फिक्स्ड वेतन का अनुपात कम होगा। भत्ते, सुविधाएं व अन्य लाभ का हिस्सा ज्यादा रहेगा।
इंडियन इंस्टीट्यूट आफ फारेन ट्रेड नई दिल्ली के एक छात्र को मार्च में 25 लाख रुपए सालाना का प्रस्ताव मिला था। लेकिन इसमें से 5 लाख रुपए ही ऐसे थे जिसका मिलना पक्का था यानी वेतन में इसे घटाया नहीं जा सकता था। बाकी 20 लाख रुपए उस छात्र के कामकाज पर निर्भर था।
इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट कोलकाता में परिवर्तनशील वेतन का हिस्सा फिक्स्ड वेतन का 25-100 फीसदी था। आईआईएमसी के प्रो पी अग्निहोत्री का कहना था कि कंपनियां अब अस्थाई या वैरिएबल वेतन का हिस्सा बढ़ाती जा रही हैं।
बिजनेस स्कूलों से भर्तियां करने वाले उद्योगों में निवेश बैंक, बीमा और वित्तीय सेवा, आईटी कंपनियों को आर्थिक मंदी का बोझ उठाना पड़ेगा। आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के चीफ-एचआर जुधाजीत दास का कहना है कि कंपनियां ज्यादा खर्च करने के मूड में नहीं हैं। वह इस सीजन में वैरिएबल पे का हिस्सा 20-25 फीसदी रखने वाली है।
आमतौर पर जब भी सीजन शुरू होता है, संस्थान और भर्ती करने वाले उत्साहित रहते हैं। इस बार सावधानी रखी जा रही है। बेशक अब भी वेतन लाखों और करोड़ों मे ंरहेंगे लेकिन छात्रों को यह देखना पड़ेगा कि वे घर कितना वेतन ले जा रहे हैं।
कोटक महिंद्रा के मानव संसाधन के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रसिडेंट सुभ्रो भादुड़ी का कहना है कि अगर नया कर्मचारी नतीजे देने में विफल रहता है तो संभव है कि उसे अस्थाई वेतन या वैरिएबल पे का हिस्सा मिले ही नहीं।
क्यों होगा कैपस में: -कंपनियां अब भी लाखों-करोडों के प्रस्ताव तो देंगी लेकिन उनमें निश्चित आय का हिस्सा कम होगा।-वैरिएबल पे यानी अस्थाई आय का हिस्सा ज्यादा होगा और यह ऐसी आय है जो कर्मचारी के प्रदर्शन से जुड़ी है।
-जिन कर्मचारियों का प्रदर्शन कमजोर रहेगा, हो सकता है उन्हें वैरिएबल पे या अस्थाई आय मिले ही नहीं।