मुंबई.रिजर्व बैंक ने कई बार ब्याज दरें बढ़ाईं, लेकिन कर्ज की मांग है कि थमने का नाम नहीं ले रही। वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को रोकना है तो कर्ज की मांग पर काबू करना होगा। सवाल यह है कि क्या कर्ज बांटने की दर घटाने के लिए रिजर्व बैंक फिर ब्याज दरें बढ़ाएगा?
क्यों नहीं घटी कर्ज की मांग:
रिजर्व बैंक के मौद्रिक उपाय देश में कर्ज की मांग घटाने में असफल साबित हुए हैं। रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 15 अगस्त तक बैंकों के कर्ज की कुल बकाया राशि २४,40,078 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसमें करीब 5,01,846 करोड़ रुपए (करीब 26 फीसदी) 2008 में बंटे हैं, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि के दौरान ३,६४,२क्४ करोड़ रुपए (करीब २३ फीसदी) ही बंट पाए थे।
वित्त वर्ष में अधिक वृद्धि :
वित्त वर्ष 2008-09 में (अप्रैल से) अब तक 78,164 करोड़ रुपए कर्ज के तौर पर वितरित किए गए हैं, जो 3.3 फीसदी वृद्धि दर्शाते हैं। पिछले वित्त वर्ष समान अवधि के दौरान कर्ज में महज 0.4 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई थी।
बीस फीसदी है कंफर्ट लेवल :
रिजर्व बैंक कर्ज में २क् फीसदी तक वृद्धि बर्दाश्त कर सकता है। वितरण इससे अधिक बढ़ने पर वह मांग घटाने के उपाय करने शुरू कर देता है।
कंपनियों से अच्छी मांग :
ब्याज दर वृद्धि के बावजूद कापरेरेट सेक्टर में कर्ज की मांग बढ़ी है। कमजोर शेयर बाजार के कारण भी कंपनियां बैंकों के पास जा रही हैं।
जमीन जायदाद से सतर्क बैंक :
रियल एस्टेट क्षेत्र में अधिक जोखिम व नीचे आती कीमतों को देखते हुए बैंक इससे जुड़ी कंपनियों को कर्ज देने से बच रहे हैं। येस बैंक के सीईओ राणा कपूर कहते हैं कि वे शेयरों के विरुद्ध लोन व रिटेल बैंकिंग के तहत पर्सनल लोन देने का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग से ज्यादा मांग :
बैंक आफ महाराष्ट्र के सीएमडी एलेन परेरा बताते हैं कि कर्ज की सबसे ज्यादा मांग मैन्यूफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर से आ रही है। वाणिज्यिक वाहन, इंफ्रास्ट्रक्चर व कंपोनेंट से जुड़े उद्योगों में अच्छी वृद्धि देखने को मिल रही है, जबकि निजी वाहन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है।
कर्ज की अच्छी मांग
‘कापरेरेट सेक्टर से कर्ज की मांग निजी क्षेत्र के बैंकों के पास आ रही है, जबकि तेल कंपनियां पब्लिक सेक्टर बैंकों पर आश्रित हैं।’ -चंदा कोचर, ज्वाइंट एमडी, आईसीआईसीआई बैंक
बैंक बने बेहतर विकल्प
‘शेयर बाजारों में अत्याधिक उतार-चढ़ाव के कारण कंपनियां धन की जरूरत पूरी करने के लिए बैंकों से कर्ज ले रही हैं।’ -राणा कपूर, एमडी/सीईओ, येस बैंक
ज्यादा फैलाया कर्ज
‘कुछ बैंकों ने कर्ज जमा अनुपात बिगड़ने के बावजूद तेजी से कर्ज वितरण बढ़ाया है। शीर्ष बैंक इन बैंकों की नीतियों की समीक्षा करेगा।’
- रिजर्व बैंक (मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा के दौरान)