भोपाल.
प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव की वोटर लिस्ट में करीब 15 लाख ऐसे लोगों के नाम भी शामिल थे, जो दुनिया में नहीं रहे। चौंकाने वाला यह खुलासा जनगणना के आंकड़ों और वोटर लिस्ट में दर्ज मतदाताओं की तादाद की तुलना करने के दौरान हुआ।
वोटर लिस्ट में दर्ज 80 साल से ज्यादा उम्रवालों की तादाद जनगणना सूची की तुलना में 300 फीसदी ज्यादा पाई गई। ‘भूत’ के रूप में मौजूद इन नामों का दुरुपयोग हुआ हो, इस आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
प्रदेश में मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए समय 30 सितंबर तक बढ़ाए जाने के पीछे यही सबसे बड़ी वजह है। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक पिछले चुनाव की सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अब तक 10 लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान कर ली गई है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, लेकिन वोटर लिस्ट में उनके नाम दर्ज थे।
यह नाम अब काटे जा रहे हैं, लेकिन अभी भी करीब तीन से पांच लाख तक ऐसे लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिनकी मौत हो चुकी है। इन्हें भी मतदाता सूचियों से हटाने की प्रक्रिया जारी है।
216 विस क्षेत्रों में औसतन दो हजार से ज्यादा मृतकों के नाम दर्ज थे : मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से चुनाव आयोग को भेजी गई चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 216 विधानसभा क्षेत्रों की वोटर लिस्ट में 2000 से ज्यादा ऐसे मतदाताओं के नाम दर्ज हैं, जिनकी मौत हो चुकी है। जबकि 144 विस क्षेत्र तो ऐसे हैं, जहां ऐसे वोटरों की संख्या पांच हजार तक पाई गई। 32 विस क्षेत्रों में 5000 से ज्यादा ऐसे मतदाता दर्ज थे और एक दर्जन विस क्षेत्रों में तो ‘भूतों’ की तादाद 6000 से भी ज्यादा पाई गई।
ऐसे सामने आया मामला : मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने वर्ष 2001 की जनगणना के आंकड़े और आबादी में औसतन वृद्धि के गणित की तुलना वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट और मतदाताओं की अनुमानित वृद्धि से की। इससे यह तथ्य सामने आया कि वोटर लिस्ट में 80 साल से अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या जनगणना की तुलना में 300 फीसदी ज्यादा है।
इस जानकारी ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के आला अफसरों के होश उड़ा दिए। मई-जून 2007 में बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर ऐसे नामों की पहचान की गई, जो मर चुके हैं, बाहर चले गए हैं या जिनके नाम दो जगह की वोटर लिस्ट में थे। करीब 10 लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान कर ली गई है, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन वोटर लिस्ट में दर्ज हैं। इन नामों की काटने की कार्रवाई चल रही है।
दर्ज हैं तीन से पांच लाख मृतकों के नाम वोटर लिस्ट में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक अभी भी वोटर लिस्ट और जनगणना के आंकड़ों की तुलना के लिहाज से 80 साल से ज्यादा उम्र वाले मतदाताओं की तादाद जनसंख्या के मुकाबले 120 फीसदी ज्यादा है। यानी करीब तीन से पांच लाख ऐसे लोगों के नाम वोटर लिस्ट में दर्ज हैं जिनके बारे में अनुमान है कि वे अब दुनिया में नहीं रहे।
‘चुनाव आयोग मतदाता सूची शत-प्रतिशत सही होने के मामले में कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे लोगों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं रहने देंगे जो अब दुनिया में ही नहीं हैं।’
- आर.बालाकृष्णन, उप निर्वाचन आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग
‘करीब 10 लाख ऐसे नामों की पहचान कर ली गई है, जो अब इस दुनिया में ही नहीं हैं और मतदाता सूची में दर्ज थे। अभी भी ऐसे और भी नाम वोटर लिस्ट में हो सकते हैं, जिन्हें हटाने का अभियान जारी है। 19 सितंबर तक संशोधित सूचियां मांगी गई हैं, जिन पर बीएलओ से लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) के दस्तखत होंगे। मृतकों के नाम दर्ज पाए गए तो यह अधिकारी जिम्मेदार होंगे।’
- जेएस माथुर, मुख्य निर्वाचन, पदाधिकारी मप्र