जयपुर. राजधानी में पचास प्रतिशत से ज्यादा विवाह स्थलों को जयपुर नगर निगम न तो लाइसेंस जारी कर पाया है और न उनको सील किया गया, जबकि पांच महीने पहले राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा इस संबंध में कड़ा आदेश दिया गया था कि नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
हालांकि निगम ने कोर्ट के आदेश के बाद विवाह स्थलों को शहर से दूर शिफ्ट करने के लिए जेडीए से जमीन मांगी थी, पर यह काम तीन महीने से अटका हुआ है। लाइसेंस कमेटी के चेयरमैन व उपमहापौर पंकज जोशी ने पहले भास्कर से बातचीत (6 अप्रैल) में कहा था कि बिना लाइसेंस वालों को 15 मई तक का समय दिया गया है, पर तब से कुछ नहीं हो पाया है।
शहर में पांच सौ से ज्यादा विवाह स्थलों में से केवल 241 के पास ही लाइसेंस है। कमोबेश यही हाल खाद्य पदार्थो की बिक्री करने वाले दुकानदारों का है। दस हजार से ज्यादा दुकानों में से केवल 3947 को ही लाइसेंस जारी किए जा सके हैं। यही नहीं, नौ सौ से ज्यादा छोटे-बड़े होटल, रेस्त्रां व हलवाइयों की दुकानों में से 505 के पास ही निगम का लाइसेंस है। इस बारे में भी जोशी ने कहा था कि 15 अप्रैल तक लाइसेंस लेने को कहा गया है।
विज्ञापन के लिए भी लाइसेंस
नगर निगम एक ओर खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों, रेस्त्रां व हलवाई की दुकानों को लाइसेंस जारी करने में नाकाम रहा है, लेकिन इनको नियोन साइन बोर्ड लगाने के लिए भी लाइसेंस लेने को कहा है। सिविल लाइंस जोन में 88 प्रतिष्ठानों को लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। ये लाइसेंस 7 गुणा 1 फुट से बड़ा तथा 12 गुणा 8 फुट से छोटे विज्ञापन पर ही जारी किया जाएगा।
अधिकारी दोषी
उपमहापौर पंकज जोशी का कहना है कि 250 से ज्यादा विवाह स्थलों के लाइसेंस जारी नहीं होने के लिए संबंधित अधिकारी ही दोषी हैं। विवाह स्थल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसकी जांच करवाई जाएगी।