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उजड़ गए बाग-बगीचे

रायपुर. garden राज्य में तीन साल पहले शुरू हुए राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) का बुरा हाल है। उद्यानिकी विभाग ने हर्बल और सुगंधित फसलों के नाम पर केंद्र से मिले करोड़ों रुपए खर्च कर दिए हैं, लेकिन फसलें तबाह है। यही वजह है कि केंद्र ने इस साल बजट रोक दिया।

विभाग ने सात जिलों के 24 गांवों को बतौर माडल पेश किया है। दावा है, इन गांवों में फलो और सुगंधित फसलों की अच्छी खेती हो रही है। किसानों को आम, काजू, नीबू, सहित लेमनग्रास, स्रिटीडोरा व पामारोजा से खासी आमदनी हुई। विभाग के ब्रोशर में इसका बखूबी बखान किया गया है, लेकिन मैदानी हकीकत चौकाने वाली हैं। कई माडल गांव के किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। तंग आकर उन्होंने फसलें खुद उखाड़ डाली हैं। बागवानी कागजों में ही है।

इस संवाददाता ने विभाग के इन माडल गांवों का जायजा लिया। किसानों से बातचीत में जो जानकारी मिली वह चौंकाने वाली है। विभाग ने दुर्ग जिले के जाताघर्रा गांव को सुगंधित फसलों के लिए माडल घोषित किया है। विभाग का दावा है कि वहां स्रिटीडोरा की विशेष खेती की जा रही है। लेकिन जिन किसानों ने लेमनग्रास और स्रिटीडोरा की फसल लगाई थी, वे इसे उखाड़ चुके हैं। विभाग ने इस गांव में सुगंधित तेल निकालने लाखों रुपए खर्च कर प्रोसेसिंग प्लांट भी लगाया है।

वह कंडम पड़ा हुआ है। किसान मोहन यादव व प्रदीप वर्मा ने बताया कि विभाग ने इन फसलों से लखपति बनाने का सपना दिखाया था, लेकिन उल्टे घाटा हो गया। पहले साल इस फसल से उन्होंने 20 लीटर तेल निकाला था। दूसरे साल तेल नहीं निकला। बरहापुर के किसान बलराम वर्मा को विभाग ने आम के पौधे दिए थे। लेकिन उनमें से एक भी नहीं बढ़ा। इनके अलावा सैकड़ों किसानों को फूलों की खेती के लिए नेट बांटे गए। वहां न तो फूल उगे न ही कोई शेडनेट तैयार हुआ।

कबीरधाम जिले में भी यही स्थिति है। हमारे कवर्धा संवाददाता ने बोड़ला ब्लाक के खड़ौदा, कांदापारा और कामाडबरी गांव की स्थिति देखी। वहां के किसान मनीदास, पंचूसिंह, जेठू उइके ने लगभग 10 एकड़ में पिछले साल स्रिटीडोरा के पौधे लगाए थे। सभी पौधे मर गए। उसी गांव के अशोक धुर्वे, झाडूराम साहू और भीखम साहू को विभाग ने आम के पौधे दिए थे। उन्हें आश्वासन दिया गया कि इनकी फैंसिंग और खाद के लिए भी पैसे दिए जाएंगे। एक साल बाद भी उन्हें पैसे नहीं मिले। वहां एक भी पौधा जीवित नहीं है। उद्यान विभाग के प्रचार में इस गांव को भी माडल बताया गया है।

यही हाल कोरबा जिले का है। हमारे संवाददाता के अनुसार हरदीबाजार व उसके आसपास के गांवों में लेमनग्रास की फसल लगाई गई थी लेकिन किसानों को तीन साल में इससे एक पैसे की आमदनी नहीं हुई। कटघोरा के विधायक बोधराम कंवर ने तीन एकड़ में एलोवेरा और एक एकड़ में लेमनग्रास लगवाई थी।

श्री कंवर का कहना है कि विभाग ने पौधे लगवा दिए लेकिन इसकी प्रोसेसिंग पर ध्यान नहीं दिया। प्रोसेसिंग संयंत्र का उपकरण एक साल पहले आया लेकिन मशीन पड़े-पड़े खराब हो रही है। सरगुजा जिले की भी यही स्थिति है। इस योजना में लगाए गए सामुदायिक ट्यूबवेल को बिजली कनेक्शन नहीं मिल सका है। वर्मी कंपोस्ट, मशरूम उत्पादन के नाम पर लाखों खर्च किए गए लेकिन इससे कोई फायदा नहीं मिला।

किसानों का कहना है कि दर्जनभर एनजीओ को इसकी खेती सिखाने के लिए लाखों रुपए बांट दिए गए। एनजीओ एग्रीकान के अध्यक्ष संकेत ठाकुर का कहना है कि जैसे नतीजे आने चाहिए थे वैसे नहीं आए। एनजीओ ने अपना काम पूरा कर दिया है। प्रोसेसिंग यूनिट चलाने में किसान रुचि नहीं ले रहे। उद्यान विभाग ने 17050 एकड़ में लगी इन फसलों से निकलने वाले उत्पाद की खरीदी के लिए हर्बल कंपनियों से एग्रीमेंट भी किया था। लेकिन तेल ही नहीं निकला।

केंद्र ने रोका बजट
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उद्यानिकी विभाग को तीन साल में 100 करोड़ से अधिक का बजट दिया गया। इसमें से आधी राशि ही खर्च हो सकी। विभाग ने 2008-09 के लिए 25 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है लेकिन केंद्र ने इसे यह कहकर रोक दिया है कि पहले पिछले साल की राशि खर्च की जाए।

अफसर बदले
बागवानी मिशन के बंटाधार के बाद उद्यान विभाग के डायरेक्टर जेसीएस राव का तबादला कर दिया गया। उनकी जगह आलोक कटियार को डायरेक्टर बनाया गया है। सूत्रों का कहना है कि श्री राव फारेस्ट विभाग से आए थे इसलिए उन्होंने फल-सब्जी के बजाए सुगंधित और हर्बल फसलों को प्राथमिकता दी। अलबत्ता राज्य के किसान इन फसलों की खेती करना नहीं जानते।

केंद्र ने बजट नहीं रोका है। वह किस्तों में राशि देता है। अभी 25 करोड़ का प्रोजेक्ट मिलने वाला है। हाल ही में प्रभार मिलने की वजह से पिछले वर्षो में लगाई फसलों से कितना बदलाव आया,यह बताना संभव नहीं।
- आलोक कटियार, डायरेक्टर उद्यान

योजना एक नजर में
>> 11 जिलों में लागू
>> 241 क्लस्टर में 1633 गांव
>> 62633 किसान लाभान्वित
>> 1350 सामुदायिक ट्यूबवेल
>> 89747 हे. में फसलों का रोपण
>> 7000 महिलाओं को मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण





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