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20 लाख टन का बनेगा एल्यूमिना प्लांट

कोरबा(बालकोनगर). बालको संयंत्र की वर्तमान उत्पादन क्षमता साढ़े तीन लाख टन सालाना है। पिछले वर्ष ८ अगस्त को इसकी एल्यूमिनियम उत्पादन क्षमता 10 लाख टन करने हेतु यहां साढ़े 6 लाख टन का नया स्मेल्टर स्थापित करने के लिए रायपुर में राज्य सरकार के साथ करार किया गया था। बालको बोर्ड ने इस विस्तार परियोजना को स्वीकृति दे दी है।

बालको की स्थापित एल्यूमिना उत्पादन क्षमता २ लाख टन सालाना है। विनिवेश से पहले बालको की एल्यूमिनियम उत्पादन क्षमता १ लाख टन की थी, जिसे बढ़ाकर विनिवेश करार के अनुसार ३.५ लाख टन कर लिया गया। 540 मेगावाट का नया पावर प्लांट भी स्थापित किया गया। बालको विस्तार के इस पहले चरण में ५ हजार करोड़ का निवेश हुआ। यह सारा विस्तार बालको ने सुनिश्चित समय सीमा में किया, जो उल्लेखनीय है। बालको की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए इससे दुगुनी उत्पादन क्षमता का एल्यूमिना प्लांट आवश्यक है।

बालको के विनिवेश के ७ वर्ष बाद भी इस दिशा में योजना नहीं बनाने पर अनेक सवाल खड़े हुए थे। एक लाख टन एल्यूमिनियम उत्पादन के लिए 4 लाख टन बाक्साइट की औसतन आवश्यकता होती है। बाक्साइट पर रासायनिक प्रक्रिया कर पहले एल्यूमिना पाउडर बनाया जाता है। इसे तीव्र तापमान पर प्रक्रिया करने पर लिक्विड मेटल मिलता है। इस तरह ४ लाख टन एल्यूमिनियम से जहां 2 लाख टन एल्यूमिना पाउडर मिलता है,वहीं दो लाख टन एल्यूमिना पाउडर से एक लाख टन एल्यूमिनियम बनता है। एल्यूमिना प्लांट को एल्यूमिना रिफायनरी भी कहा जाता है। स्मेल्टर में एल्यूमिना से एल्यूमिनियम बनता है।

बालको बने पूरी तरह से आत्मनिर्भर: सूरी
वेदांत समूह के सीईओ (एल्यूमिनियम बिजनेस) प्रमोद सूरी ने कहा कि बालको को विश्व का सबसे बड़ा एल्यूमिनियम उत्पादक बनाने के साथ उसे विश्व स्तरीय कंपनी बनाने का हमारा लक्ष्य है। विश्व में कहीं भी एक स्थान पर 10 लाख टन एल्यूमिनियम बनाने वाला संयंत्र नहीं है। स्मेल्टर जब 10 लाख टन का होगा, तो एल्यूमिना संयंत्र 20 लाख टन क्षमता का अपरिहार्य है। स्मेल्टर विस्तार को बोर्ड ने स्वीकृति दे दी है। दीपावली के बाद पहले चरण का कार्य शुरू हो जाएगा।





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