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बदतमीज़ी बर्दाश्त नहीं

पूर्व मिस इंडिया तनुश्री दत्ता ‘आशिक़ बनाया आपने’, ‘चाकलेट’, ‘36 चाइना टाउन’ और ‘भागमभाग’ जैसी सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा बनकर थोड़े ही समय में स्टार बन गई थीं। पिछले साल प्रदर्शित उनकी कुछ फिल्में नहीं चलीं, लेकिन इन दिनों वह हॉलीवुड के विख्यात बैनर ‘वार्नर ब्रदर्स’ की पहली हिंदी फिल्म ‘सास बहू और सैंसेक्स’ को लेकर ख़ासी उत्साहित हैं, जो अगले महीने रिलीज होने वाली है। हाल ही में तनुश्री से हमारी बात हुई, तो सबसे पहले हमने इसी फिल्म के बारे में पूछा-

‘वार्नर ब्रदर्स’ की ‘सास बहू और सैंसेक्स’ आपको मिली कैसे?

सब जानते हैं कि यह दुनिया के सबसे बड़े 4-5 प्रोडक्शन हाउसेस में से एक है। इनका कारोबार दुनिया भर में फैला हुआ है और हर प्रमुख देश में इनके ऑफ़िस हैं। जब यह प्रोडक्शन हाउस पहली हिंदी फिल्म के निर्माण में उतरा, तो उन्होंने हीरोइनों के मामले में रिसर्च की और मेरे वाले कैरेक्टर के लिए मुझे सबसे उपयुक्त पाया। वजह यह कि उन्हें नित्या नाम के किरदार के लिए ऐसी लड़की चाहिए थी, जो यहां लोकप्रिय भी हो और जिसकी कोई इमेज भी न हो। चूंकि मैंने शुरू से ही अलग-अलग किरदार निभाए हैं, मैं उनके पैमाने पर खरी उतरी। वाक़ई यह मेरे लिए गर्व की बात है कि ‘वार्नर ब्रदर्स’ की पहली हिंदी फिल्म की हीरोइन मैं हूं।

आपकी भूमिका क्या है?

पढ़ी-लिखी और मॉडर्न होते हुए भी सीधी-सादी लड़की है। किरण खेर मेरी मां के रोल में हैं, जिनके कारण उसे पढ़ाई ख़त्म करते ही नौकरी करनी पड़ती है। संक्षेप में कहूं, तो इसकी कहानी यह है कि आज की औरत सास-बहू के सीरियलों से दिमाग़ हटाकर शेयर बाजार के सैंसेक्स तक पर पैनी नजर रखती है। इसमें मेरे साथ फारुख़ शेख़ और किरण खेर जैसे मंजे हुए एक्टर हैं। यूं मेरे अपोजिट अंकुर खन्ना हैं, लेकिन सब्जैक्ट ओरिएंटेड फिल्म होने के कारण हमारा ख़ास रोमांटिक ट्रैक नहीं है।इस बार लंबे गैप के बाद आपकी फिल्म आ रही है?

हां, क्योंकि फिल्मों के चुनाव को लेकर मैं काफ़ी सतर्क हो गई हूं। एक साल से मैंने तय कर लिया है कि सिर्फ़ गिनती बढ़ाने के लिए फिल्में नहीं करनी हैं। हालांकि सतर्क पहले भी थी, फिर भी कुछ ग़लत फिल्में कर गई। अगर पहले से पता हो कि यह फिल्म नहीं चलेगी, तो कौन साइन करना चाहेगा! ख़ैर, ‘स्पीड’ और ‘ढोल’ के एक साल बाद ‘सास..’ आ रही है, पर इसके बाद इतना गैप नहीं आएगा। फिर अगले ही महीने मेरी ‘रामा- दि सेवियर’ रिलीज होगी।

‘रामा- दि सेवियर’ काफ़ी लेट हो गई?

बिल्कुल नहीं। पहले से तय था कि इसे अक्तूबर, 2008 में रिलीज किया जाएगा। हां, इसे बनने में समय लगा। इसका कारण यह है कि यह बहुत बड़े बजट की फिल्म है, जिसमें ढेर सारा एक्शन और स्पैशल इफैक्ट्स हैं। इसकी शूटिंग भी बैंकॉक सहित कई अन्य देशों में हुई है।

सुना है, इसमें आपने काफ़ी एक्शन किया है?

बहुत ख़तरनाक एक्शन सीन हैं मेरे। इसके लिए मुझे एक्शन डायरैक्टर पीटर हैंस से कई दिनों ट्रेनिंग लेनी पड़ी थी। इस फिल्म की एक्शन गर्ल और ‘सास बहू..’ की सीधी-सादी नित्या में ज़मीन-आसमान जितना फर्क़ है।

आपने एक्शन सीख ही लिया था, तो अक्षय कुमार के टीवी शो ‘फियर फैक्टर’ में हिस्सा क्यों नहीं लिया?

मुझे उसका ऑफर आया था, लेकिन मैं अपनी नई शुरू होने वाली फिल्मों की तैयारी और स्टेज शोज़ में बिज़ी थी।

कौन से स्टेज शो? शाहरुख़ का ‘टैम्पटेशन- 2’ या अमिताभ का ‘द अनफॉरगेटेबल टूर’?

नहीं, इन दोनों में से कोई नहीं। इनमें से किसी के लिए मुझे बुलाया ही नहीं गया। मेरे शोÊा इंडिया में ही थे और मेरे ही नाम पर थे।

शुरू होने वाली फिल्में कौन-सी हैं, जिनकी तैयारी में व्यस्त थीं?

अगले महीने ‘श्री अष्टविनायक सिनेविजन लि.’ की ‘रन भोला रन’ सैट पर जा रही है, जिसमें मेरे अलावा गोविंदा जी, तुषार कपूर और अमीषा पटेल हैं। इसके बाद जो दो फिल्में शुरू होंगी, उनकी डीटेल्स अभी से देना ठीक नहीं है।

कोई रीजनल फिल्म भी कर रही हैं?

एक भी नहीं। मुझे कोलकाता से भी ऑफर आए और साउथ से भी, लेकिन कई बार सब कुछ पसंद आने के बावजूद कुछ ऐसा हुआ कि फिल्म नहीं कर सकी। फ़िलहाल तो मेरा ध्यान हिंदी फिल्मों पर है, जिस कारण मैंने एड् वग़ैरह के एसाइनमैंट्स भी लेने कम कर दिए हैं। हां, कोई बहुत अच्छा टीवी शो होस्ट करने का मौक़ा मिला, तो करूंगी। मुझे लगता है कि मैं अच्छी होस्ट साबित हो सकती हूं।

ख़ैर, यह बताइए कि नाना पाटेकर कंट्रोवर्सी से आपको कितना नुक़सान हुआ?एक परसेंट भी नहीं, उल्टा फ़ायदा ही हुआ। लोग अच्छी तरह जान गए कि मैं कैसी लड़की हूं और समझ गए कि यह सीधी और शिष्ट तो है, लेकिन किसी की बदतमीज़ी बर्दाश्त नहीं कर सकती।

क्या सैट पर मचे हंगामे के बाद नाना ने फ़ोन-वोन करके खेद प्रकट किया? आपसे संपर्क किया? नहीं। जो लोग जानबूझकर ग़लती करते हैं, वे बाद में माफ़ी नहीं मांगते। माफ़ी मांगने की ताक़त हो, तो ग़लती ही क्यों करें!





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