भिवानी.
बीजिंग ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतकर देश का चहेता बने विजेंद्र कुमार का पेशेवर मुक्केबाजी अपनाने का कोई इरादा नहीं है। विजेंद्र ने यह बात सोमवार को कही।
एकमात्र ओलिंपिक पदक विजेता भारतीय मुक्केबाज विजेंद्र को इस बात का अफसोस है कि वे पूर्व हैवीवेट चैंपियन मुक्केबाज इवेंडर होलीफील्ड से बीजिंग में मुलाकात नहीं कर पाए। उन्होंने बताया कि होलीफील्ड उनका सेमीफाइनल मुकाबला देखने के इरादे से वहां पहुंचे थे, लेकिन तब तक मुकाबला खत्म हो चुका था। विजेंद्र क्यूबा के इमेलियो कोरेया से यह मुकाबला हार गए थे। इसके बाद भी होलीफील्ड ने विजेंद्र के प्रदर्शन की तारीफ की थी।
विजेंद्र कहते हैं कि होलीफील्ड द्वारा प्रशंसा हासिल करना किसी के भी लिए सम्मान की बात है और वे स्वयं इससे प्रफुल्लित हैं। पेशेवर मुक्केबाजी अपनाने के सवाल पर वे कहते हैं कि पहले उन्होंने इसके बारे में सोचा था, लेकिन यह ज्यादा रुचिकर नहीं लगा। उन्होंने कहा कि वे शौकिया मुक्केबाजी पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। पेशेवर मुक्केबाजी की दुनिया में जाने की उनकी योजना नहीं है।
ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले विजेंद्र बताते हैं कि बीजिंग में हुए पहले मुकाबले में उन्हें गहरी चोट आई थी। उनके कॉलर बोन में इंजरी थी। घुटने में भी काफी दर्द था। कुल मिलाकर उनकी हालत खराब थी।
विजेंद्र कहते हैं कि यदि इस हालत के बाद भी वे पदक जीतने में कामयाब रहे, तो इसका श्रेय हीथ मैथ्यूज को है, जिन्होंने अल्प समय में उन्हें रिंग में उतरने के लायक बना दिया। क्वार्टर फाइनल में हारने वाले जितेंद्र कुमार की ठोढ़ी पर 11 टाकें थे, लेकिन उनके मुकाबले को देखकर किसी को भी इसका अंदाजा नहीं हुआ था। अखिल कुमार के अनुभव भी कुछ इसी तरह के हैं।
जाहिर है भारतीय मुक्केबाजों की इस सफलता के पीछे मैथ्यूज की गहरी मौजूदगी है। मैथ्यूज इसके पहले टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा के साथ भी काम कर चुके हैं।