भोपाल. प्रदेश के कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लाभ देने के फामरूले पर मंगलवार को कैबिनट की बैठक में मुहर लग सकती है। हालांकि बैठक के एजेंडे में यह विषय शामिल नहीं है, लेकिन संभावना है कि सिफारिशें कैसे और किस तरह लागू की जाए, इस बारे में चर्चा कर निर्णय लिया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के संबंध में केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद से ही वित्त विभाग की कवायद तेज हो गई है।
सिफारिशें जस की तस लागू करने पर पड़ने वाले साढ़े तीन हजार से चार हजार करोड़ के वित्तीय भार को लेकर सरकार चिंतित है। वहीं चुनावी वर्ष में वह कर्मचारियों को नाराज भी नहीं करना चाहती, इसलिए ऐसा फामरूला तलाशा जा रहा है, जिससे आयोग की सिफारिशें लागू करने का संदेश भी जाए और सरकार पर ज्यादा आर्थिक बोझ भी न पड़े। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार में अलग-अलग पद व वेतनमान हैं, इसलिए वेतन निर्धारण में कई व्यावहारिक दिक्कतें हैं।
सोमवार को भी वल्लभ भवन में इसको लेकर हलचल रही। दूसरी तरफ वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार कैबिनेट में ले जाए बिना भी अधिसूचना जारी की जा सकती है, क्योंकि छठे वेतन आयोग की अनुशंसाओं पर रिपोर्ट देने के लिए कैबिनेट पहले ही वेतन आयोग का गठन कर चुकी है। राज्य सरकार सिद्धांतत: इस बात पर सहमत है कि राज्य के कर्मचारियों को एक सितंबर 2008 से छठवां वेतनमान दिया जाएगा।
ये हो सकता है
>> कैबिनेट में चर्चा कर एक सितंबर 2008 से नकद लाभ देने का औपचारिक निर्णय ले लिया जाए।
>> नई पे स्केल के अनुसार वेतन निर्धारित करने के बारे में राज्य वेतन आयोग को कहा जाए और उसकी अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर लागू किया जाए।
>> राज्य वेतन आयोग की रिपोर्ट आने तक अंतरिम राहत के रूप में हर वर्ग को एक निश्चित राशि दी जा सकती है। इसका भुगतान सितंबर माह की अक्टूबर में मिलने वाली तनख्वाह में जोड़कर किया जा सकता है।