भोपाल. राज्य सरकार प्रदेश के बाहर अध्ययन करने गए मप्र के छात्र-छात्राओं को लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल होने के लिए मप्र से स्नातक या हायर सेकेंडरी करने की शर्त हटा रही है।
मगर मध्य प्रदेश के मूल निवासी होने की शर्त यथावत रहेगी। इसके पीछे सरकार की मंशा बेहतर या उच्च अध्ययन के लिए राज्य से बाहर गए युवाओं को नौकरी के अवसर मुहैया कराने की है। दूसरी ओर दस साल की सेवा पूरी कर चुके दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को भी नियमित करने का तोहफा देने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना से बचने के लिए इन्हें नियमित करने का रास्ता निकाला गया है, लेकिन इसका लाभ 32 हजार में से मात्र तीन हजार कर्मचारियों को ही मिलने के आसार हैं।
इन मुद्दों पर विचार कर निर्णय लेने के लिए मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक होने जा रही है। मंत्रालय में सुबह 11 बजे आयोजित बैठक में सबसे मुख्य मुद्दा लगभग 32 हजार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितिकरण का है।
उमा देवी विरुद्ध कर्नाटक राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने की इजाजत दी है। इसके तहत सरकार उन पदों पर कर्मचारियों को नियमित कर सकेगी, जो भर्ती के समय रिक्त थे और उस पद पर संबंधित कर्मचारी को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नियुक्त किया गया था।
राज्य सरकार दस साल की सेवा पूर्ण कर चुके दैनिक वेतन भोगियों को कुछ छूट देकर नियमित करने जा रही है। इतना ही नहीं वह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियमित करने के लिए आयु सीमा से लेकर शैक्षणिक योग्यता तक की छूट देने पर विचार कर रही है। हालांकि वित्त एवं विधि विभाग ने नियमितीकरण के खिलाफ अपना अभिमत दिया है।
अन्य अहम मुद्दे
>> विधानसभा चुनाव 2008 के लिए मंजूर अस्थाई पदों की पूर्ति के लिए सीधी भर्ती पर लगे प्रतिबंध को शिथिल करना।
>> राज्य निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ तिलहन संघ और सपनि के कर्मचारियों का आयोग में संविलियन।
>> डिग्री प्राप्त विभागीय उम्मीदवारों को पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के पद पर पदोन्नति।
>> ग्वालियर शहर की अगले 50 वर्र्षो की पेयजल जरूरत की पूर्ति के लिए ककैटों-पैहसारी बांधों से तिघरा बांध तक पाईप लाइन बिछाने की योजना की मंजूरी।
>> अभा पाल महासभा को भोपाल में भूमि का आवंटन।