इंदौर.
शहर में एक ओर जहां गणोशोत्सव की धूम होगी वहीं मुस्लिम समाज के लोग रोजा रख अल्लाह की इबादत करेंगे। सोमवार को चांद दिखने के साथ ही मुस्लिम समाज के रमजान शुरू हो गया। मंगलवार को पहला रोजा रखा जाएगा।
इसके बाद बुधवार को गणोश चतुर्थी भी है, ऐसे में शहर में हर जगह गणोशजी की अगवानी की जाएगी। गुरुवार से दिगंबर जैन समाज पयरुषण पर्व की आराधना करेगा। हालांकि बोहरा समाज के रमजान पहले ही शुरू हो गए। श्वेतांबर जैन समाज के पयरुषण भी चल रहे हैं।
इबादत और नेकी की राह पर चलना ही रमजान
पवित्र माह रमजान के साथ ही मुस्लिम समाज के लोग रोजे रखेंगे, भूखे-प्यासे रहकर हर हाथ अल्लाह की इबादत के लिए उठेगा। रमजान को सबसे पाक माह माना गया है। शहरभर की मुस्लिम बस्तियों में छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग और महिलाएं सभी रोजे रख अल्लाह की इबादत में जुटेंगे।
शहर काजी डॉ. इशरत अली के अनुसार रमजान माह में रोजे रख अल्लाह की इबादत की जाती है। रोजे रखना यानी तकवे वाली जिंदगी बसर करना। उन्होंने कहा रमजान में आंख, कान, जुबां, पैर, हाथ सहित जिस्म के हर हिस्से का रोजा होता है। आंख का इसलिए कि वह बुरा नहीं देखे, कान बुरा नहीं सुने, जुबां बुरा नहीं कहे। उन्होंने कहा रमजान में भूखे-प्यासे रहकर रोजे रखने के पीछे बुनियादी मकसद तकवे वाली जिंदगी बसर करना है।
इब्राहिम कुरैशी के अनुसार रमजान माह में कुरान का अवतरण हुआ था। इस माह में रोजे का विशेष महत्व है, रोजे रख व्यक्ति अल्लाह की इबादत करता है। श्रीनगर एक्सटेंशन निवासी सैयदा खालिद कहती हैं नजर, जुबां, कान आदि से भी हमें सिर्फ अच्छे ही काम करना चाहिए। कुरान शरीफ में भी कहा गया है कि इंसान को ज्यादा से ज्यादा नेकी और इबादत करनी चाहिए।