संपादकीय. बिहार में आई कोसी की बाढ़ कोई सामान्य आपदा नहीं है। यह आपदा चाहे पड़ोसी देश से पानी छोड़ने की वजह से आई हो या अतिवृष्टि या किसी बंध के टूटने से, सभी परिस्थितियों में पूरे देश का सहयोग पीड़ितों के साथ है और उन्हें हरसंभव सहायता की पेशकश भी हो रही है, पर सबसे ज्यादा दु:खदायी यह जानकारी है कि कुछ लोग इन पीड़ितों पर और जुल्म ढा रहे हैं।
पीड़ितों को पहुंचाई जा रही राहत सामग्री पर दबंग लोगों द्वारा अधिकाधिक कब्जा कर लेना तो एक बात है, अब कुछ अपराधी तत्व पीड़ितों को बचाने आए लोगों पर हमला कर उन्हीं को लूट रहे हैं। इसीलिए लोग अपने परिजन को वहां आने से रोक रहे हैं, साथ ही लगभग सभी पीड़ितों ने यह मांग की है कि राहत कार्य में केवल सेना के सशस्त्र जवान ही लगाए जाएं।
इसी तरह कुछ असामाजिक तत्व अनाथ हो गए या अपनों से बिछड़ गए बच्चों को बेचने के उद्देश्य से उन्हें अगवा कर रहे हैं। और तो और, पीड़ित महिलाओं के साथ भी दुराचरण के भी कुछ समाचार मिल रहे हैं। ऐसा नहीं है कि पूरे बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में ऐसी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन तब भी इससे ज्यादा दु:ख और आक्रोश की बात और क्या हो सकती है कि हमारे समाज के ही कुछ लोग अपने साथ के स्त्री-पुरुष और बच्चों के ऊपर आई विपत्ति का फायदा उठाने की सोच भी सकते हैं।
ट्रेन या अन्य दुर्घटनाओं में मृत या घायल लोगों के सामान लूटने की घटनाएं तो कभी-कभी सुनने में आती थीं पर बाढ़ पीड़ितों पर ऐसी मुसीबत टूट पड़ना निश्चय ही निंदनीय है। ऐसे कुत्सित काम करते पकड़े जाने वाले लोगों को सख्त से सख्त सजा मिलना चाहिए।
बिहार की एक अराजक राज्य होने की छवि धीरे-धीरे बदल रही है और इस परिवर्तन में वहां के लोगों का ही सबसे ज्यादा योगदान है। ऐसे में वहां की सरकार और जिम्मेदार लोगों को इस तरह के हालात पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
अपराध करना एक बात है, पर अपना सब कुछ खो चुके लोगों के साथ ऐसा अमानवीय कृत्य किसी भी दशा में क्षमा नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही बाढ़ का पानी उतरने के बाद गंदगी और बीमारियों से बचने के उपायों पर भी अभी से काम शुरू करने की जरूरत है, क्योंकि बाढ़ के बाद की परिस्थितियां कई बार बाढ़ से भी ज्यादा विकराल रूप ले लेती हैं।