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देर से आना, जल्दी जाना

जयपुर. officer सोमवार सुबह 9:30 बजे सचिवालय का नजारा हमेशा से एकदम अलग था। कोई कर्मचारी हाथ में लंच बॉक्स लिए दौड़ रहा है तो कोई महिला कर्मचारी कैमरे के फ्लैश से बचते हुए चेहरे को साड़ी का पल्लू डालकर ढंक रही है।

हर किसी के कदम आम दिनों की अपेक्षा काफी तेज हैं। मुख्य सचिव से लेकर उपसचिव स्तर तक के अधिकारी भी पहले दिन लेटलतीफ का ठप्पा लगने के डर से उतावले..। ज्यादातर अधिकारी पोर्च में गणोशजी को धोक लगाते हुए अपने कमरों की ओर बढ़े तो कुछ ऐसे भी थे जो देरी के चलते दूर से सिर हिला तेजी से बढ़ चले।

‘फाइव डे वीक’ का पहला दिन होने के कारण अधिकारी-कर्मचारियों की दिनचर्या बदल सी गई। अब तक आमतौर पर सुबह दस बजे बाद जहां चहल-पहल शुरू होती थी, वहां अधिकारियों और कर्मचारियों को अब सवेरे साढ़े नौ बजे पहुंचना होगा। पांच दिन के सप्ताह का पहला दिन अधिकारियों और सचिवालय कर्मचारियों के लिए परेशानी भरा रहा। सुबह उठकर जल्दी तैयार हुए। नाश्ता किया।

ज्यादातर विभागों में अधिकांश कर्मचारी देर से दफ्तर आए और जल्दी घर चले गए। सचिवालय में पहले दिन कर्मचारियों से पहले अधिकारियों ने आने में जल्दी दिखाई। मुख्य सचिव डी.सी.सामंत और प्रमुख सचिव गृह एस.एन. थानवी नियत समय पर पहुंच गए। इसके बाद अन्य अधिकारी भी आते रहे।

बदले हुए निर्धारित समय सुबह 9:30 बजे सचिवालय के दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति करीब दस फीसदी ही रही। दस बजे तक आधे से ज्यादा कर्मचारी आ चुके थे।

वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में बी.बी.मोहंती, गोविंद शर्मा, यदुवेंद्र माथुर सुबह 9:35 बजे तक अपने कमरे में नहीं पहुंचे थे। जलदाय विभाग के प्रमुख शासन सचिव जी.एस.संधू ने जोधपुर से फोन पर ठीक 9:30 बजे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की उपस्थिति कन्फर्म की। प्रमुख वित्त सचिव सुभाष गर्ग 9:35 बजे तेज कदमों से चलते हुए दफ्तर पहुंचे। संवाददाता को देख गर्ग बोल पड़े-‘रोज टाइमली आता हूं।’ प्रमुख सचिव जल संसाधन वी.एस.सिंह समय पर आकर कंप्यूटर पर काम करने में लग गए।

कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव परविंदर सिंह समय पर आ गए लेकिन विशेषाधिकारी पी.रमेश 9:40 तक नहीं आए। प्रमुख सचिव सहकारिता चंद्रमोहन मीणा समय पर आकर अखबार पढ़ने में लग गए। उद्यानिकी सचिव संजय दीक्षित 9:48 बजे दफ्तर पहुंचे।

पहले दिन के नजारे
-पहले पहुंच चुके कर्मचारी देरी से आने वाले अपने साथी कर्मचारी को टोकते हुए कह रहे थे-पहले ही दिन लेट हो गए।
-देरी से आने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी अपने साथियों को लेट होने के बारे में सफाई देते रहे।
-बसों से सचिवालय आने वाले कर्मचारियों को परेशानी हुई। वे बसों के पुराने समय के कारण लेट ही दफ्तर पहुंचे।
-विभिन्न इलाकों से मंत्रियों या अधिकारियों से मिलने के लिए सचिवालय आने वाले लोग भी सुबह 9:30 बजे से ही प्रवेश पास बनवाने के लिए खिड़की पर खड़े हो गए।
-समय जल्दी होने के कारण रोजाना लंच लाने वाले कई कर्मचारी सोमवार को लंच नहीं ला सके।

हाउसिंग बोर्ड को आदेश का इंतजार

पूरे प्रदेश में कर्मचारी सोमवार से सुबह 9:30 बजे दफ्तर आए या आने की कोशिश, लेकिन हाउसिंग बोर्ड को अभी इस बारे में सरकारी आदेश का इंतजार है। खुद मंडल आयुक्त ने कहा- अभी हमें आदेश नहीं मिले। यहां के लगभग सभी कर्मचारी 10 बजे बाद ही दफ्तर पहुंचे। मंडल अध्यक्ष ने कहा- पुराना बुखार धीरे-धीरे उतरेगा। सरकारी कार्यालयों में 10 बजे ही हाजिरी रजिस्टर की जांच की गई।

चित्तौड़गढ़. सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित एकाध दफ्तरों के तो ताले भी नहीं खुले। कुछ दफ्तरों में दस बजे तक कई कर्मचारी भागते-दौड़ते दफ्तर पहुंचे।

भीलवाड़ा. कलेक्ट्रेट के पंजीयन मुद्रांक व यूआईटी सहित अधिकतर विभाग सूने थे। डीईओ एलिमेंट्री सहित कुछ विभागों में तो कुछ कर्मचारी समय से पूर्व आ गए।

नागौर. सरकारी विभागों में अधिकांश कर्मचारी दस बजे बाद ही ऑफिस पहुंचे। उधर, एडीएम ने देरी से आए आठ कार्मिकों की अनुपस्थिति दर्ज कर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए।

पाली. सोमवार को अधिकारी तो निर्धारित समय पर पहुंचे, मगर अधिकांश कर्मचारी कर्मचारी लेट हो गए। अफसर दस बजे तक अपने मातहतों के आने का इंतजार करते रहे। सीकर. भास्कर टीम ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया तो वहां मौजूद कर्मचारियों में खलबली मच गई। कलेक्ट्रेट, वन विभाग, जलदाय विभाग, महिला एवं बाल विकास, साक्षरता विभाग आदि में कहीं अधिकारियों की कुर्सी खाली मिली तो कहीं लिपिक ही नदारद पाए गए। अजमेर. कलेक्टर नवीन महाजन सहित तमाम अफसर सुबह 9.30 से 9.40 बजे तक दफ्तर पहुंचे। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का दफ्तर सवा दस बजे तक खाली था। अधिकारियों के चैंबर के ताले नहीं खुले। बोर्ड सचिव मिरजूराम शर्मा सवा दस बजे बाद पहुंचे।

कलेक्टर भी देरी से पहुंचे
अलवर. ज्यादातर दफ्तरों में अधिकारी और कर्मचारी देरी से पहुंचे। जिला कलेक्टर भास्कर ए.सावंत भी देरी से दफ्तर आने वालों में शामिल हैं। वे करीब 10 मिनट देरी से पहुंचे। इसके अलावा कई आरएएस अधिकारी, इंजीनियर और शिक्षा विभाग के कर्मचारी भी समय पर नहीं आए। कई दफ्तरों के तो ताले तक नहीं खुले थे। आधे से ज्यादा दफ्तर रोजाना की तरह 10 बजे के बाद ही शुरू हुए।

श्रीगंगानगर. कलेक्ट्रेट, सीएमएचओ, कृषि, नगर परिषद, जिला परिषद, पंचायत समिति, सीएमएचओ, कृषि, एसपी कार्यालय समेत एक भी कार्यालय ऐसा नहीं था, जहां अधिकारी व उनका स्टाफ सभी समय पर पहुंच गए हों। इनमें समय पर पहुंचने वाले अधिकारी काम शुरू करने के लिए कर्मचारियों का इंतजार करते रहे।

बाड़मेर. जिला मुख्यालय स्थित सरकारी कार्यालयों में सोमवार को अधिकतर कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचे।





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