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पदोन्नति में गड़बड़ी

बिलासपुर. शिक्षा विभाग में नए सेटअप के आधार पर की जा पदोन्नति विवादों में नजर आ रही है। विभाग ने एक ओर जहां अधिकांश शिक्षकों से विकल्प पत्र नहीं भरवाया, वहीं जिनसे भरवाया गया, उन्हें भी चाही गई जगह नहीं दी गई है।

सूची के मुताबिक एक ही स्कूल में दो-दो प्रधान पाठकों की पदस्थापना कर दी गई है। इन सभी खामियों के मद्देनजर जिला शिक्षक समिति के नेतृत्व में सोमवार को करीब 2 सौ शिक्षकों ने डीईओ बीएल र्कुे का घेराव कर दिया।

शिक्षा विभाग में नए सेटअप के अनुसार प्रधान पाठक एवं उच्चवर्ग शिक्षक के पद पर क्रमश: 1 हजार एवं 7 सौ सहायक शिक्षकों को पदोन्नति दी गई है। पदोन्नति से किसी को किसी प्रकार का आर्थिक लाभ नहीं है। शासन की नीति के अनुसार सहायक शिक्षकों को उनके कार्यरत संस्था में ही रिक्त पद होने की स्थिति में उसी शाला में अथवा उसी गांव, मोहल्ले या संकुल केंद्र में पदस्थापित किए जाने का निर्देश है। इसके विपरीत शिक्षा विभाग द्वारा ऐसा किया ही नहीं गया है।

इसी का परिणाम है कि कीर्तिनगर प्राथमिक शाला सिरगिट्टी, प्राथमिक शाला बहतराई एवं प्राथमिक शाला नगोई सहित करीब 18 से भी अधिक स्कूलों में दो प्रधानपाठकों को पदस्थापित कर दिया गया है। इन्हीं अनियमितताओं को लेकर जिला शिक्षक समिति ने शिक्षा विभाग में जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शन में मुख्य रूप से समिति के अध्यक्ष रामकुमार यादव, सचिव कोमल पाटनवार, जगत मिश्रा, जीआर चंद्रा, एमपी आड़े, अवधेश शुक्ला सहित बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल थे।

जमकर हुआ लेनदेन
विभागीय सूत्रों के मुताबिक पदोन्नति आदेश जारी करने के दौरान प्रमोशन पाने वालों से जमकर लेनदेन किया गया है। इस दौरान एप्रोच लगाने वालों को जहां लेनदेन में रियायत बरती गई है, वहीं कुछ को पूरी तरह बख्श दिया गया। बताया जाता है कि आदेश जारी करने के लिए कोई फिक्स राशि नहीं है, लेकिन प्रापर बिलासपुर चाहने वालों से 15-20 हजार, शहर से लगे गांवों के लिए 10-15 हजार एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 5 हजार रुपए लिए गए हैं। इस दौरान सारे लेनदेन माध्यमों की मदद से हुए हैं।

15 सितंबर तक जारी होगी संशोधित सूची
शिक्षा विभाग में घंटों चले नाटकीय प्रदर्शन के बाद डीईओ बीएल र्कुे ने 15 सितंबर तक संशोधित सूची जारी करने की बात कही है। विभाग द्वारा यदि पहले से पारदर्शिता बरती गई होती तो संशोधन की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। विभाग द्वारा पदोन्नति सूची ब्लाक कार्यालयों में तो भेजी गई, लेकिन वहां से सार्वजनिक नहीं की गई। यही कारण है प्रत्येक पद पर लेनदेन का सिलसिला ब्लाक स्तर से ही शुरू हो गया था।

कर्मचारी नेता भी कम नहीं
बताया जाता है कि अपने लोगों को प्रमोशन का लाभ दिलाने कर्मचारी नेताओं द्वारा विभाग को लंबी-लंबी लिस्ट दी गई थी। इस दौरान कुछ प्रकरण पर सुनवाई नहीं होने के कारण ही घेराव करके दबाव बनाने का प्रयास किया गया है। इस दौरान यदि उच्चधिकारियों ने कर्मचारी नेताओं की लिस्ट पर विचार कर लिया तो हो सकता है कि यह विरोध समर्थन में बदल जाए। कुल मिलाकर नुकसान शिक्षकों को ही उठाना पड़ रहा है।





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