जालंधर. चिल्ड्रन फिल्म सोसायटी की तरफ से स्कूली बच्चों के लिए शुरू किए बाल फिल्म महोत्सव के पहले दिन जमकर हंगामा हुआ।
सुबह 8 बजे शुरू होने वाले पहले शो के लिए शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के प्राइमरी व सैकेंडरी विंग से 1200 विद्यार्थियों को मल्टीप्लैक्स में बुलाया, जबकि दोनों थियेटर में कुल 723 बच्चों के बैठने का प्रबंध था। जैसे-तैसे मल्टीप्लैक्स प्रबंधन ने अतिरिक्त कुर्सियों की व्यवस्था करवाकर स्कूल स्टाफ सहित 750 लोगों के बैठने की व्यवस्था करवाई। गर्मी व भीड़ की धक्का-मुक्की से परेशान विभिन्न स्कूलों के स्टाफ ने शेष 500 बच्चों को वापस भेजने के लिए अपने खर्च पर कैंटर, ऑटोज व अन्य वाहन मंगवाए।
मेहमान को भी मुश्किल से मिली सीट : शो का रस्मी उद्घाटन करने डिप्टी कमिश्नर अजीत सिंह पन्नू आधा घंटा देरी से पहुंचे, मगर मेजबान जिला शिक्षा अधिकारी एलीमैंटरी जोगिंदर दास तब तक नहीं पहुंचे थे। डीसी पन्नू तक को ‘एग्जिट गेट’ के पास टैम्परेरी सीट के सहारे डेढ़ घंटा गुजारना पड़ा।
पहले दिन विद्यार्थियों को फिल्म ‘फोटो’ व ‘लिलकी’ दिखाई गई। फैस्टिवल 6 दिवसीय है, जिसे जिले के विभिन्न थियेटर्स में चलाया जा रहा है। फैस्टिवल के लिए शिक्षा विभाग ने ज्यादा आए बच्चों की जान दांव पर लगाकर उन्हें एक-एक ऑटो में 25-25 की संख्या में भरा।
अध्यापकों का कहना था कि उन्हें डीईओ दफ्तर से संबंधित पत्र में इतना ही निर्देश था कि 1 से 6 सितंबर तक बच्चों को लेकर पहुंचे। डीईओ सैकेंडरी व एलीमेंटरी को जिला प्रशासन की तरफ से अलग-अलग पत्र मिलने से दोनों वर्ग के विद्यार्थी वहां पहुंच गए। डीईओ सैकेंडरी हरिंदर साहनी ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि एलीमेंटरी वर्ग को अलग से पत्र गया है, उन्हें तो सिर्फ सैकेंडरी वर्ग को पहुंचाने के निर्देश थे।