जालंधर. जालंधर में पिछले पांच साल में चालीस फीसदी इकाइयों पर ताले लग चुके हैं। यह खुलासा केंद्रीय उद्योग मंत्रालय के माइक्रो, स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज विभाग द्वारा जालंधर की औद्योगिक इकाइयों पर किए जा रहे सर्वे से हुआ है। हर पांच साल बाद देश में इंडस्ट्री की स्थिति जानने के लिए सर्वे करवाया जाता है।
जालंधर में सर्वे अप्रैल माह से चल रहा है, जो पूरा होने को है। चार हजार इकाइयों मे काम करने वाले हजारों लोग बेरोजगार हुए हैं। सर्वे कर रहे अधिकारियों के मुताबिक साल 2002 में जिले के औद्योगिक विभाग के पास रजिस्टर्ड इकाइयों की संख्या साढ़े बारह हजार थी, जिसमें से 40 फीसदी बंद हो चुकी हैं। इस हिसाब से बंद इकाइयों की संख्या चार हजार से ऊपर बनती है।
बंद होने वाली इकाइयों में ज्यादातर इंजीनियरिंग और रबड़ उद्योग से जुड़ी वे छोटी इकाइयां हैं, जो कच्चे माल के बढ़ते दाम का भार सहन नहीं कर सकी। कैपीटल की कमी और बदलते समय के साथ नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल न करने का भी असर पड़ा। इंजीनियरिंग उद्योग में बंद होने वाली इकाइयों में ज्यादातर हैंड टूल्स, नट एंड बोल्ट, गोराया में टोका इंडस्ट्री, कापर इंडस्ट्रीज, पाइप फिटिंग, गेट वाल्व इंडस्ट्री आदि शामिल हैं। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल के डिप्टी रीजनल चेयरमैन अश्विनी कुमार के मुताबिक सरकार ने भी छोटी इकाइयों को मदद नहीं दी।
पंजाब में न तो आधारभूत ढांचा है और न ही बिजली। असंगठित क्षेत्र में लगी कई इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई से बंद हो गईं। सरकार को इंडस्ट्री की तरफ ध्यान देना चाहिए।
रबड़ गुड्स मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.बी ज्योति का कहना है कि देश के केरला की रबड़ लाबी और देश के दूसरे हिस्सों में बैठे रबड़ की डीलर काफी मजबूत हैं। कच्ची रबड़ की जमाखोरी कर वे मनमाने दाम वसूल रहे हैं। महंगे कच्च माल होने के कारण उन्हें मजबूरन कारोबार बंद करने पड़ रहे हैं।
सर्वे में सहयोग करें उद्यमी
सर्वे कर रहे अधिकारियों का कहना है कि उद्यमियों को सहयोग करना चाहिए ताकि केंद्र सरकार के पास सही स्थिति पहुंचे और केंद्र कोई पैकेज जारी कर सके।