हिसार.आने वाले दिनों में सामान्य नस्ल की घोड़ी भी स्टेलियन नस्ल के घोड़े के बच्चे पैदा कर सकेगी। हिसार में सेना के अश्व प्रजनन केंद्र में भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीकी से इसके लिए परीक्षण भी शुरू हो गया है। इस बेहद खर्चीली प्रक्रिया के परीक्षण के शुरुआती परिणाम काफी उत्साहवर्धक बताए जा रहे हैं।
जरूरत क्यों ? : अश्व प्रजनन केंद्र के कमांडेंट कर्नल एसएस कंवर ने बताया, ‘इस विश्वस्तरीय प्रजनन केंद्र में सालाना करीब 400 स्टेलियन घोड़े के बच्चे तैयार होते हैं जो मांग के अनुपात में काफी कम हैं। इस नस्ल की घोड़ियों की कमी के कारण केंद्र ने एक परीक्षण कार्यक्रम के तहत इनका कृत्रिम प्रजनन शुरू किया है।’
साधारण मां की विशिष्ट संतान : कर्नल कंवर ने बताया कि सैन्य कार्य में उपयोगी स्टेलियन घोड़े की कीमत करीब एक करोड़ रुपए होती है। भ्रूण प्रत्यारोण तकनीक के इस्तेमाल से इस नस्ल के घोड़े-घोड़ियों से विकसित भ्रूण को आठ-दस हजार रुपए की सामान्य घोड़ी के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाएगा।
आनुवांशिक गुण स्टेलियन के ही : भ्रूण प्रत्यारोण तकनीक की विशेषता यह है कि इस तकनीक से जन्मी संतान के आनुवांशिक गुण स्टेलियन नर-मादा से ही मेल खाएंगे, उस साधारण घोड़ी से नहीं जिसके गर्भ का इस्तेमाल बच्चे के भ्रूण के विकास के लिए किया जाएगा।
खर्चीली है तकनीक : विशेषज्ञों के मुताबिक उपरोक्त तकनीक काफी खर्चीली है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो लाख रुपए का खर्च आएगा। रक्षा शोध व विकास संगठन ने तीन साल पहले केंद्र के इस कार्यक्रम पर मुहर लगाई थी।
क्या है भ्रूण प्रत्यारोण तकनीक : भ्रूण प्रत्यारोण तकनीक के तहत वांछित नर, मादा घोड़ों के अंडाणुओं और शुक्रणुओं को प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है। इसके तीन दिन बाद परखनली में विकसित भ्रूण को सामान्य घोड़ी के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।
स्टेलियन नस्ल के घोड़ों की खासियत
. जर्मन ब्रीड के इन घोड़ों में सीखने की कमाल की क्षमता होती है।
. घुड़दौड़ के दौरान इनका विशिष्ट अंदाज लुभावना होता है।
. लंबी कूद में भी कमाल की खूबियां देखने को मिलती हैं।
. ज्यादातर रेसिंग में इस्तेमाल
. ओलिंपिक में घुड़सवारी से संबंधित प्रतियोगिताएं अमूमन इन्हीं पर।